कुनो, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में दो चीते जंगल में पुनः छोड़ दिए गए हैं। यह कार्यक्रम राज्य सरकार द्वारा जीव संरक्षण और जैविक विविधता को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह यादव ने इस घटना को ऐतिहासिक बताया और कहा कि मध्य प्रदेश अब ‘चीता राज्य’ के रूप में पूरी तरह से मान्यता प्राप्त कर चुका है।
मध्य प्रदेश राज्य सरकार और वन विभाग की संयुक्त कोशिशों से यह पुनर्वास परियोजना सफल रही है। दो युवा चीते जिन्हें बंदी स्थितियों से मुक्त कर जंगल में छोड़ा गया है, उनका स्वास्थ्य और व्यवहार विशेषज्ञों की लगातार निगरानी में है। मुख्यमंत्री यादव ने कहा, “यह हमारी पर्यावरण संरक्षण नीति का हिस्सा है और हम एक ऐसे राज्य के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं, जो वन्य जीवों के संरक्षण में अग्रणी है। इस प्रयास से बड़ी उम्मीदें जुड़ी हैं।”
कुनो राष्ट्रीय उद्यान में चीते का पुनः स्थापन पिछले दशकों से चली आ रही वन्यजीव संरक्षण योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। चीता, जो कभी पूरे भारत में फैला हुआ था, धीरे-धीरे विलुप्त होते चले गए थे। मध्य प्रदेश सरकार ने कई वर्षों की योजना और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की सहायता से इस परियोजना को सफल बनाया है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चुने गए चीते मजबूत और स्वस्थ हैं और प्राकृतिक आवास में उनका सहज व्यवहार देखा जा रहा है। यह परियोजना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के लिए मिसाल बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्र की जैव विविधता में सुधार होगा और पर्यावरण संतुलन भी मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री यादव ने इस अवसर पर कहा, “हमारे राज्य की चुनौतियां और अवसर दोनों बड़े हैं। वन्यजीवों की रक्षा हमारी प्राथमिकता है और हम इस दिशा में निरंतर प्रयासरत रहेंगे। प्रधानमंत्री के संरक्षण कार्यक्रमों के साथ मिलकर हम मध्य प्रदेश को एक मॉडल स्टेट के रूप में विकसित करेंगे।”
प्रदेश के लोगों ने भी इस खबर का स्वागत किया है। पर्यावरण प्रेमी एवं स्थानीय लोग इस प्रयास को अत्यंत महत्वपूर्ण मान रहे हैं। वे उम्मीद जता रहे हैं कि यह पुनर्वास योजना सफल होगी और भविष्य में मध्य प्रदेश में चीता की संख्या बढ़ेगी, जिससे पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहेगा।
Author: UP 24.in
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