मोनू कश्यप प्रकरण ने पश्चिम यूपी की राजनीति में बढ़ाई हलचल, इकरा मुनव्वर हसन का कद हुआ और मजबूत

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सहारनपुर/लखनऊ: जसाला के चर्चित मोनू कश्यप प्रकरण  को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। कैराना लोकसभा सीट से सांसद Iqra Munawwar Hasan द्वारा सहारनपुर में किया गया धरना और पुलिस प्रशासन से टकराव समाजवादी पार्टी के लिए बड़े राजनीतिक मौके के रूप में देखा जा रहा है। धरने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इकरा मुनव्वर हसन की राजनीतिक पकड़ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा खुलकर होने लगी है कि 2027 विधानसभा चुनाव में सहारनपुर जिले की सातों विधानसभा सीटों पर टिकट वितरण में इकरा मुनव्वर हसन की राय बेहद अहम रहने वाली है। समाजवादी पार्टी के अंदर उनकी बढ़ती सक्रियता और पश्चिम यूपी में लगातार मजबूत होती पकड़ को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले समय में उनका कद पार्टी में और बढ़ सकता है।

19 मई की रात को ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने इकरा मुनव्वर हसन को मोनू कश्यप  प्रकरण  के पीड़ित परिवार के साथ लखनऊ बुलाया। वहां पीड़ित परिवार से मुलाकात की गई और आर्थिक सहायता के तौर पर दो लाख रुपये का चेक भी सौंपा गया। इस घटनाक्रम को समाजवादी पार्टी द्वारा दलित और पिछड़े वर्गों के बीच बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

सहारनपुर में डीआईजी कार्यालय के बाहर हुए पूरे घटनाक्रम ने इकरा मुनव्वर हसन को अचानक प्रदेश की बड़ी महिला नेताओं की कतार में लाकर खड़ा कर दिया है। वायरल वीडियो में वह पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस करती दिखाई दीं और पीड़ित परिवार के समर्थन में मजबूती से खड़ी रहीं। उनके चेहरे पर गुस्सा, दर्द और भावुकता साफ दिखाई दे रही थी। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हुआ और समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने इसे बड़े स्तर पर उठाया।

19 मई को मोनू कश्यप प्रकरण को लेकर सहारनपुर में उस समय राजनीतिक माहौल गर्म हो गया, जब डीआईजी कार्यालय के बाहर हुए विवाद के बाद पुलिस ने समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्य मंत्री मांगेराम कश्यप समेत पांच लोगों को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई से नाराज़ कैराना सांसद Iqra Munawwar Hasan सदर थाने पहुंचीं और गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गईं।
धरना स्थल पर समाजवादी पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता पहुंच गए। धरना स्थल पर Ashu Malik, Ali Khan, Manoj Chaudhary, Chaudhary Sajid Hasan सहित समाजवादी पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक भी मौके पर पहुंचे और सांसद इकरा मुनव्वर हसन के समर्थन में नारेबाजी की।
धरना स्थल पर जुटी भीड़ और नेताओं की मौजूदगी ने पूरे मामले को राजनीतिक रूप से और बड़ा बना दिया। देर रात तक समाजवादी पार्टी के नेता धरने पर डटे रहे और प्रशासन पर दबाव बनाते दिखाई दिए। इसी दौरान कैराना विधायक Nahid Hasan भी मौके पर पहुंचे और अपनी बहन इकरा मुनव्वर हसन का खुलकर समर्थन किया। स्थानीय नेताओं से लेकर पार्टी के वरिष्ठ चेहरे तक इकरा मुनव्वर हसन के समर्थन में दिखाई दिए। उनके भाई और विधायक Nahid Hasan भी मौके पर पहुंचे। इससे यह संदेश गया कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर गंभीरता से उठा रही ह।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस पूरे घटनाक्रम ने सहारनपुर और आसपास के इलाकों में समाजवादी पार्टी को नई ऊर्जा दी है। खासतौर पर दलित और पिछड़े वर्ग के बीच यह संदेश गया कि इकरा मुनव्वर हसन पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी रहीं। धरने और वायरल वीडियो ने उनकी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया है।

विधायक Nahid Hasan बोले — “मेरी बहन शेरनी है, गरीबों और दलितों के लिए लड़ती रहेगी और वो मरहूम मुनव्वर हसन की बेटी है”

नाहिद हसन के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने इसे संघर्ष और जनसरोकार की राजनीति बताया, जबकि विरोधी दलों ने इस बयान को लेकर सवाल भी उठाए। हालांकि, सपा कार्यकर्ताओं के बीच यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है और सोशल मीडिया पर इसे बड़े स्तर पर शेयर किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने भारतीय जनता पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित, पिछड़े और मुस्लिम वोट बैंक को लेकर नई राजनीतिक गोलबंदी की चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष इस पूरे मामले को प्रशासनिक संवेदनशीलता, सामाजिक न्याय और पीड़ित परिवार के सम्मान से जोड़कर जनता के बीच ले जा रहा है।

हालांकि, Saharanpur Police ने अपने आधिकारिक बयान में किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार के आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि नियमानुसार कार्रवाई की गई। लेकिन इसके बावजूद यह मामला अब सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीति से भी जोड़कर देखा जाने लगा है।

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Author: UP 24.in

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