हैदराबाद, तेलंगाना – तेलंगाना में आज हजारों की संख्या में फार्मेसियां हड़ताल पर हैं, जिसका आह्वान ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) द्वारा किया गया है। इस हड़ताल का मुख्य कारण ऑनलाइन फार्मेसियों और कॉर्पोरेट मेडिसिन रिटेल चेन द्वारा कथित अनुचित प्रथाएं बताई जा रही हैं। फार्मेसी संचालकों का आरोप है कि वे पारंपरिक फार्मेसियों के अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं और नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
AIOCD ने इस विवादित मुद्दे पर प्रदेश सरकार और केंद्रीय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ऑनलाइन फार्मेसियों द्वारा भारी छूट, पुराने प्रिस्क्रिप्शन्स की मान्यता और तेज़ी से, यानी केवल 10 मिनट में दवाइयां पहुंचाने की सेवाओं को बढ़ावा देने से पारंपरिक फार्मेसियां अपने ग्राहकों को खो रही हैं। इससे उनके व्यवसाय पर गहरा असर पड़ा है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दवाओं की असली कीमतों से काफी कम मूल्य पर दवा उपलब्ध कराए जाने से जहां ग्राहक खुश हैं, वहीं पारंपरिक दुकानदारों का कहना है कि यह मार्केट में अनुचित प्रतिस्पर्धा को जन्म देता है। वे बताते हैं कि ऑनलाइन फार्मेसियां दवाओं के सटीक सत्यापन और प्रिस्क्रिप्शन नियमों के पालन में लापरवाही बरत रही हैं, जिससे दवा सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
हड़ताल में शामिल फार्मासिस्टों और केमिस्ट यूनियनों ने सरकार से आग्रह किया है कि वे ऑनलाइन फार्मेसी व्यवसाय को सही दिशा में नियंत्रित करें और पारंपरिक फार्मेसियों को संरक्षण दें, ताकि स्वास्थ्य सेक्टर में प्रतिस्पर्धा न्यायसंगत और सुरक्षित रह सके।
सरकार ने फिलहाल मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित विभागों को स्थिति का विस्तार से अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों को परेशान न करना सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
यह हड़ताल तेलंगाना में दवा वितरण व्यवस्था में एक बड़ी चुनौती प्रस्तुत करती दिख रही है, जिसमें सरकार, फार्मेसी संस्थान और ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं के मध्य संतुलन स्थापित करना आवश्यक हो गया है।
Author: UP 24.in
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