आईआईटी में घुसा एक ट्रोजन हॉर्स

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A Trojan horse has breached the IITs

नई दिल्ली, भारत – भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की पाठ्यचर्या में भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्रों के तत्वावधान में मिथक आधारित प्रश्नों को शामिल करने की योजना ने शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बना दिया है। इस पहल के तहत विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई में पारंपरिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को एकीकृत करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञ और शिक्षा के जानकार इस परिवर्तन को लेकर विभिन्न मत प्रकट कर रहे हैं।

भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्रों का उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान, संस्कृति और दर्शन को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना है। हालांकि, IIT जैसे उच्च तकनीकी संस्थान जहां वैज्ञानिक सटीकता और तर्कसंगत सोच को प्राथमिकता दी जाती है, वहां मिथकों को प्रश्नों की रूपरेखा में शामिल करना ज्ञान के मानकों से समझौता करने जैसा माना जा रहा है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि विज्ञान की शिक्षा में तथ्यात्मक और व्यावहारिक ज्ञान ही प्राथमिक होना चाहिए, क्योंकि तकनीकी क्षेत्र में यही आधार बनता है। यदि मिथक आधारित प्रश्नों को पाठ्यक्रम में अनावश्यक रूप से शामिल किया जाता है, तो इससे छात्रों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर प्रभाव पड़ सकता है और उनकी समस्या सुलझाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

वहीं, कुछ वर्ग इस पहल को देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का सकारात्मक कदम मानते हैं। उनका तर्क है कि अगर सही संदर्भ और सीमाओं के भीतर इन विषयों को पढ़ाया जाए तो यह भारतीय युवाओं की पहचान और सोच के लिए लाभकारी हो सकता है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इसे लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श और विशेषज्ञ सलाह ली जाएगी। IIT की पाठ्यचर्या में किसी भी बदलाव को लेकर छात्र समुदाय, शिक्षाविद और तकनीकी उद्योग के हितधारकों की प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

शिक्षा नीति के विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि किसी भी नई पहल को लागू करने से पहले उसका व्यापक प्रभाव अध्ययन तथा गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना आवश्यक होगा। वे इस बात पर सहमति जताते हैं कि तकनीकी शिक्षा में वैज्ञानिकता से समझौता किए बिना सांस्कृतिक ज्ञान को सही रूप में शामिल किया जाना चाहिए।

अंत में, IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पारंपरिक मिथक आधारित विषयों को जोड़ने के प्रयासों ने एक बहस को जन्म दिया है, जो न केवल शिक्षा के स्वरूप पर, बल्कि देश की सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक पहचान पर भी गहरा असर डाल सकता है। इस मुद्दे पर आगे की चर्चाएँ और सावधानीपूर्वक दृष्टिकोण आवश्यक होंगे।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

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