यक्षगाना ने अभिनव ग्रोवर को अभिनेता के रूप में कैसे आकार दिया

SHARE:

How Yakshagana shaped Abhinav Grover the actor

Mumbai, Maharashtra – नया नाट्य मंचन ‘Yogi vs Bhogi’, जिसका निर्देशन प्रसिद्ध नाटककार महेश दत्तानी ने किया है, अंग्रेज़ी में 7वीं सदी के संस्कृत नाटक ‘भगवदज्जुकम’ पर आधारित है। यह मंचन पुरानी काल्पनिक कथा को हास्य, दर्शनशास्त्र, लिंग और यक्षगाना की मिश्रित कला के साथ प्रस्तुत करता है, जिसे पुनःथा थिएटर ने प्रस्तुत किया है।

भगवदज्जुकम एक प्राचीन संस्कृत व्यंग्य नाटक है, जिसमें अध्यात्म और सांसारिक जीवन के बीच की लड़ाई दर्शाई गई है। यक्षगाना, जो कि कर्नाटक की एक पारंपरिक नाट्यशैली है, इसे इस प्रस्तुति में जीवंत और मनमोहक रूप में जोड़ा गया है। महेश दत्तानी ने इस माध्यम के जरिए दर्शकों को प्राचीन संस्कृत नाटक की गहरी समझ और आधुनिक सामाजिक मुद्दों के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास किया है।

मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, महेश दत्तानी ने कहा कि इस नाटक में हास्य का प्रचुर उपयोग दर्शकों को सहजता से जटिल दार्शनिक विषयों से परिचित कराता है। उन्होंने आगे बताया, “यक्षगाना की जीवंतता और रंगों ने इस प्राचीन कहानी को नई जान दी है। हमारा लक्ष्य दर्शकों को केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि सोचने पर मजबूर करना भी है।”

पुनःथा थिएटर की टीम ने इस नाटक को प्रस्तुत करने में परंपरा और नवाचार का बेहतरीन संयोजन दिखाया है। कलाकारों की अभिव्यक्ति, संगीत और नृत्य ने यक्षगाना की पारंपरिक शैली को एक नई पहचान दी है। इस नाटक में नाटकीयता के साथ-साथ संस्कृत साहित्य की गहराई भी बखूबी दिखाई गई है।

‘Yogi vs Bhogi’ की समीक्षा करते हुए साहित्यिक आलोचकों ने इसे भारतीय रंगमंच के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है, जो पुरातन और वर्तमान के बीच सेतु का कार्य करता है। उनका कहना है कि यह नाटक न केवल मनोरंजक है, बल्कि दर्शकों को जीवन, मोक्ष और सामाजिक समरसता के विषयों पर गहरा विचार करने का अवसर भी प्रदान करता है।

इस नाटक का प्रदर्शन जल्द ही कई प्रमुख थिएटर फेस्टिवलों में भी होने वाला है, जहां इसकी व्यापक प्रशंसा की उम्मीद है। पारंपरिक और आधुनिक रंगमंच के सम्मिलन की अनूठी प्रस्तुति के चलते यह नाटक भारतीय रंगमंच के इतिहास में अपनी जगह बना रहा है।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

News