नई दिल्ली, भारत
हरियाणा और राजस्थान ने नई दिल्ली में 1994 के अपर यमुना नदी बोर्ड समझौते को लागू करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस अवसर पर संघीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस ज्ञापन का उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच यमुना नदी के जल संसाधनों के साझा प्रबंधन और समान वितरण को प्रभावी एवं सुव्यवस्थित बनाना है।
यमुना नदी भारत के पश्चिमी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण जलस्रोत है, जो कई राज्यों के लिए जीवनदायिनी भूमिका निभाती है। पिछले कुछ दशकों से जल-साझा समझौते का क्रियान्वयन अपेक्षित गति से नहीं हो पाया था, जिससे दोनों राज्यों के बीच जल वितरण को लेकर कई बार विवाद भी सामने आए। इस नए MoU के तहत दोनों पक्ष समझौतों के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे।
संधि के माध्यम से न केवल जल वितरण को सुनिश्चित किया जाएगा बल्कि यमुना नदी के संरक्षण और जल गुणवत्ता को बनाए रखने के उपाय भी लागू किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से क्षेत्रीय जल विवादों में कमी आएगी एवं पारिस्थितिकी को भी लाभ मिलेगा।
संघीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “जल संसाधन हर प्रदेश और राष्ट्र की समृद्धि का स्तंभ हैं। हमें इनके न्यायसंगत और स्थायी उपयोग के लिए हर संभव प्रयास करना होगा। हरियाणा और राजस्थान का यह निर्णय प्रशंसनीय है जो स्पष्ट रूप से राज्यों के बीच सहयोग की भावना को दर्शाता है।”
दोनों राज्यों के अधिकारियों ने भी इस MoU को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह जल प्रबंधन में नई मिसाल स्थापित करेगा। आगामी वर्षों में यमुना नदी के जल संरक्षण, बेहतर योजना संचालन और साझा जिम्मेदारी के साथ जल सुरक्षा की दिशा में यह समझौता अहम साबित होगा।
राज्य सरकारों ने साथ मिलकर यमुना के जल प्रवाह, जल संग्रहण, कृषि एवं घरेलू जल आवश्यकताओं के संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया है। इसके साथ ही जल संरक्षण के लिए तकनीकी सहायता, डेटा साझा करना और लोक जागरूकता अभियानों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
इस MoU से जुड़ी पात्रता समितियां समय-समय पर बैठकर इस समझौते के क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगी और आवश्यक समायोजन भी सुझाएंगी। इस पहल को देश में राज्यों के बीच जल विवादों के समाधान के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
संक्षेप में, हरियाणा और राजस्थान द्वारा 1994 के अपर यमुना जल-साझा समझौते को लागू करने के लिए किए गए इस नवीनतम समझौते ने कई वर्षों से अटका हुआ जल विवाद हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति दिखाई है। यह न केवल जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का उदाहरण होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी जल सुरक्षा की गारंटी भी प्रदान करेगा।




