लखीसराय, बिहार – NEET-UG पुनः परीक्षा के दौरान धोखाधड़ी के आरोप में नौ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। एसपी के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में अन्य 10 से 12 संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जिनमें बायोमैट्रिक ऑपरेटर और मध्यस्थ शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि यह गिरोह प्रीमियम लेकर परीक्षा में दूसरों की जगह सचलता से फर्जी उम्मीदवारों को बैठाने का काम करता था। मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई अहम सबूत मिले हैं जो इस धोखाधड़ी के पूरे नेटवर्क को उजागर कर रहे हैं।
एसपी ने बताया कि अभी तक गिरफ्तार किए गए लोगों में मुख्य रूप से फिंगरप्रिंट ऑपरेटर, परीक्षा केंद्र के असाइन किए गए कर्मचारियों और कुछ स्थानीय एजेंट शामिल हैं। पुलिस इन सभी से तफतीश कर रही है ताकि इस जाल को पूरी तरह से बेनकाब किया जा सके।
पुलिस अधिकारी ने कहा, “यह अप्रिय घटना हमारे सिस्टम की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है। हम इस मामले में कार्रवाई कर रहे हैं ताकि कानूनी प्रक्रिया के तहत अपराधियों को दंडित किया जा सके।” उन्होंने जनता से भी जांच में सहयोग करने की अपील की है।
जिला प्रशासन ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहेगी। आगामी परीक्षाएं सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, और ऐसे किसी भी प्रयास को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं।
इस मामले ने शिक्षा व्यवस्था में फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार की समस्या को उजागर किया है, जिसे लेकर सरकार और प्रशासन सतर्क हैं। इस संदर्भ में आगामी दिनों में कई और कार्रवाइयां हो सकती हैं, जिससे परीक्षा प्रक्रिया को मजबूत बनाया जा सके।
पुलिस जांच अभी भी जारी है और यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस गिरोह के और कितने बड़े सदस्य शामिल हैं। फिर भी यह माना जा रहा है कि ये नौ गिरफ्तार आरोपी केवल इस बड़े जाल के कुछ हिस्से हैं।
इस प्रकार के मामले युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा हैं। सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा के लिए नई नीतियां बनाने की भी आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
Author: UP 24.in
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