नई दिल्ली, भारत
देश में मलेरिया नियंत्रण और उन्मूलन प्रयासों के लिए एक बड़ी चुनौती सामने आ गई है क्योंकि मलेरिया परजीवी में एंटीमलेरियल दवाओं के प्रति प्रतिरोध देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि विशेष रूप से आर्टेमिसिनिन आधारित उपचारों के प्रति परजीवी में उत्पन्न हो रहे म्युटेशन भारत में मलेरिया नियंत्रण की दिशा में गंभीर खतरा हैं।
मलेरिया, जो देश के कई हिस्सों में अभी भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है, को नियंत्रित करने के लिए आर्टेमिसिनिन आधारित संयोजन थेरेपी (ACT) सबसे प्रभावी माना जाता है। हालांकि, हाल के अध्ययनों से पता चला है कि मलेरिया परजीवी में दवा प्रतिरोध के कारण इसकी प्रभावशीलता घट रही है। यह स्थिति मलेरिया के संक्रमण को कम करने और अंततः उससे पूरी तरह मुक्त होने के प्रयासों को धीमा कर सकती है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यदि इस दवा प्रतिरोध का पता न लगाया गया और इसके प्रभावी प्रबंधन के कदम न उठाए गए, तो भारत में मलेरिया का पुनरुद्धार हो सकता है। उन्होंने कहा कि निरंतर निगरानी, दवाओं की प्रभावशीलता का परीक्षण और नए उपचार विकल्पों का विकास आवश्यक है।
स्वास्थ्य मंत्रालय एवं अनुसंधान संस्थान इस संदर्भ में लगातार डेटा एकत्रित कर रहे हैं और विभिन्न जिलों में मलेरिया परजीवी में म्युटेशन की दर का अध्ययन कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने आम जनता से आग्रह किया है कि वे मलेरिया से बचाव के उपायों को अपनाएं जैसे कि मच्छर नियंत्रण, बिस्तर पर मच्छरदानी का उपयोग और समय पर चिकित्सा जांच।
इसके साथ ही, सरकार ने आर्टेमिसिनिन दवाओं के संयोजन को प्रभावी बनाए रखने के लिए नई रणनीतियों को लागू करना शुरू किया है ताकि दवा प्रतिरोध को रोकने में मदद मिल सके और मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को पूरा किया जा सके। यह कदम भारत में मलेरिया मुक्त भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
अंततः, विशेषज्ञ यह मानते हैं कि सामूहिक प्रयास, शोध एवं जागरूकता से ही भारत में मलेरिया पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सकता है और दवा प्रतिरोध की चुनौती को मात दी जा सकती है। देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए यह समय सही रणनीतियों अपनाने और ठोस कदम उठाने का है।
Author: UP 24.in
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