नई दिल्ली, भारत – ब्रिक्स देशों के हालिया सम्मेलन में शहरी विकास के लिए एक व्यापक समझौता अपनाया गया, जिसमें आवास और नागरिक सेवाओं तक समान और निष्पक्ष पहुँच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इस अवसर पर आवासन मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि शहरों की योजना बनाते समय सबसे महत्वपूर्ण पक्ष वहां के निवासियों की आवश्यकताओं और उनकी भलाई को प्राथमिकता देना चाहिए।
मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि बढ़ती शहरी आबादी के मद्देनजर, भारत जैसे देशों को ऐसे शहर विकसित करने होंगे जो न केवल रहने योग्य हों, बल्कि समावेशी और टिकाऊ भी हों। उन्होंने कहा, “एक सफल शहर वह होगा जहां सभी लोगों को उचित आवास, बुनियादी सुविधाएं, और रोजगार के अवसर मिलें।”
ब्रिक्स देशों ने इस घोषणा में स्थानीय सरकारों को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया है ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में जनसंचार और भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके। साथ ही, डिजिटल समाधानों को अपनाकर शहरी सेवाओं को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। यह कदम स्मार्ट शहरों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में आने वाले वर्षों में शहरीकरण की दर बहुत तेजी से बढ़ेगी, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ेगा। इसलिए, मनोहर लाल ने कहा कि इस प्रक्रिया में सबका सहयोग आवश्यक होगा ताकि कोई भी वर्ग, खासकर कमजोर समुदाय, शहरी विकास के लाभों से वंचित न रहे।
ब्रिक्स सम्मेलन में यह घोषणा शहरी नियोजन में मानव केंद्रित दृष्टिकोण को लेकर एक साझा समझ का परिचायक है। इस पहल से यह उम्मीद की जा रही है कि शहरी केंद्रों में रहने वाले लोगों की गुणवत्ता जीवन में सुधार होगा और विकास अधिक संतुलित होगा।
निवासी लाभार्थी सेवाओं तक समान पहुँच के साथ, आवासीय परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के टिकाऊ उपयोग पर भी ध्यान दिया जाएगा। मनोहर लाल ने सम्मेलन में कहा कि हमें नवीन तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से अपने शहरों को ऐसे मॉडल में परिवर्तित करना है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आदर्श हों।
अंत में, मंत्री ने सभी ब्रिक्स देशों को आम लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया ताकि शहरी विकास मानव-केंद्रित, समावेशी एवं पर्यावरण के अनुकूल हो सके। इससे न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी बल्कि सामाजिक समानता भी बढ़ेगी।




