नई दिल्ली, भारत – विकास और स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए, ब्रिक्स देशों ने हाल ही में एक शहरी संधि को अपनाया, जिसमें शहरी विकास को अधिक समावेशी, टिकाऊ और लोगों के केंद्र में रखने पर बल दिया गया है। इस अवसर पर आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने स्पष्ट किया कि शहरों की योजना बनाते समय सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनकी जनता और उनकी आवश्यकताओं को प्राथमिकता देना है।
मंत्री ने बताया कि भारत सहित ब्रिक्स देशों को आगामी दशकों में बड़े पैमाने पर नगरीकरण का सामना करना होगा। इस समीक्षा के तहत, ‘‘शहर लोगों के लिए’’ मंच ने शहरी विकास को सभी के लिए सुगम एवं समान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनमें आवास की समान पहुंच, बुनियादी सेवाओं का विस्तार और स्थानीय सरकारों की शक्तिशाली भूमिका शामिल है।
मनोरंजन लाल के मुताबिक, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना और डिजिटल तकनीकों को अपनाना शहरी केंद्रों को अधिक जीवंत बनाने के लिए आवश्यक रणनीतियां हैं। डिजिटल समाधान न केवल प्रशासन को पारदर्शी बनाने में मदद करेंगे, बल्कि नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में भी सहायक होंगे।
ब्रिक्स देशों ने इस शहरी संधि के तहत लोगों के लिए न्यायसंगत, पर्यावरण सजग और तकनीकी रूप से उन्नत शहर बनाने पर जोर दिया है। खासतौर से भारत जैसे विकासशील देश में, इस प्रकार के मॉडल शहरी योजना के लिए एक आदर्श रूप प्रस्तुत करते हैं, जहां बढ़ती जनसंख्या और संसाधनों की सीमितता के बीच संतुलन बनाना चुनौती है।
इस पखवाड़े में आयोजित वर्चुअल सम्मेलन में, शहरी योजनाकारों, नीति निर्माताओं और एक्सपर्ट्स ने टिकाऊ शहरों के लिए नवाचार और किसान समुदायों की भागीदारी को भी चर्चा में रखा। उनका मानना है कि शहरी विकास में आम जनता की भागीदारी न केवल योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाती है, बल्कि उन्हें लंबे समय तक जीवंत रखने में भी मदद करती है।
मनोहर लाल ने राज्यों से आग्रह किया कि वे इस संधि के अनुशासन को अपने क्षेत्रीय शहरी विकास कार्यक्रमों में शामिल करें और ऐसी नीतियां बनाएं जो आम नागरिकों को सर्वोत्तम लाभ पहुंचाएं। मंत्री ने यह भी कहा कि शहरी केंद्रों का विकास तभी समग्र रूप से सफल हो सकता है जब सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय जरूरतों का संतुलित संयोजन हो।
समग्र रूप से, ब्रिक्स मंच द्वारा अपनाई गई यह शहरी संधि भविष्य के भारत और अन्य उभरते बाजारों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी, जहां शहरी जीवन को बेहतर और अधिक समावेशी बनाने के प्रयास निरंतर जारी हैं।




