Hyderabad, Telangana
हैदराबाद में आयोजित चौथे स्मृति व्याख्यान के दौरान, राज्य भाजपा अध्यक्ष ने आपातकाल के समय अपने पिता को भूमिगत रहने की 19 महीने की कठिन घड़ी याद की। यह व्याख्यान उनके 92वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था, जिसमें उन्होंने आपातकाल के दुष्प्रभावों और राजनीतिक संघर्षों पर भी प्रकाश डाला।
आपातकाल की अवधि भारत के इतिहास में एक संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण दौर था। उस समय विशेष अधिकारों के तहत कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं को दबाया गया और उनके अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए। प्रदेश भाजपा प्रमुख ने बताया कि कैसे उनके पिता, जो एक सक्रिय राजनीतिज्ञ थे, ने इस अवधि में पड़ाेशी सुरक्षा का सहारा लेकर भूमिगत होकर जनता की सेवा जारी रखी।
उन्होंने कहा कि 19 महीनों की भूमिगत यात्रा उनके पिता के साहस और समर्पण की गवाही है। इस काल में परिवार को भी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन राजनीतिक विश्वास और देशभक्ति की भावना ने उन्हें डिगने नहीं दिया। यह व्याख्यान न केवल एक व्यक्तिगत अनुभव था, बल्कि उस समय के सामाजिक-राजनीतिक माहौल की भी सजीव तस्वीर प्रस्तुत करता है।
राज्य भाजपा प्रमुख ने कहा, “हम इतिहास से सीख लेकर आज के लोकतंत्र को और मजबूत बनाएंगे। उस दौर की कठिनाईयों को भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन यह भी याद रखना आवश्यक है कि कैसे हमारे पूर्वजों ने देश सेवा की।”
चौथे स्मृति व्याख्यान का आयोजन भाजपा द्वारा किया गया था जिसमें कई वरिष्ठ नेता और समाज के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस अवसर पर वक्ताओं ने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के महत्व को रेखांकित किया और वर्तमान पीढ़ी को इसे समझने का आग्रह किया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल आपातकाल के इतिहास को याद करना था, बल्कि युवा पीढ़ी को उन मूल्यों से परिचित करवाना भी था जो हमारे लोकतंत्र को स्थिर और प्रगतिशील बनाने में सहायक हैं।
राज्य भाजपा प्रमुख अपनी भावुक स्मृतियों में यह भी साझा किया कि कैसे इस कठिन समय ने परिवार और समाज को एकजुट किया और देशभक्ति की भावना को प्रबल किया। इस विषय पर आयोजित व्याख्यान ने आपातकाल के अंधकारमय दौर को रोशनी में बदलने का प्रयास किया।
इस प्रकार, यह आयोजन न केवल एक यादगार सभा था, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और उसके पक्षधरों के अदम्य साहस का भी उत्सव था।
Author: UP 24.in
News




