किसान मजदूर मोर्चा ने भारत-यूएस व्यापार समझौते का विरोध करते हुए पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की पुतलियाँ जलाईं

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‘Anti-farmer and anti-worker’: Kisan Mazdoor Morcha protest India-US trade deal, burn effigies of PM Modi and Donald Trump

चंडीगढ़, पंजाब

पंजाब के किसानों और मजदूरों ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने इस समझौते को किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों के लिए हानिकारक बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पुतलियां बेरहमी से जलाकर अपना विरोध जताया।

किसान मजदूर मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि क्षेत्र और छोटे व्यवसायों के लिए खतरा है क्योंकि इससे अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात में वृद्धि होगी, जो कि भारी सब्सिडी प्राप्त करते हैं। इससे भारत के स्थानीय किसानों को अनियमित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा और उनकी आमदनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

प्रदर्शन में शामिल किसान नेताओं ने कहा कि पिछले कई वर्षों से चल रहे कृषि कानूनों के विरुद्ध संघर्ष की तरह, इस समझौते के खिलाफ भी वे MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी और सिंचाई सुधारों की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिना उचित नियमों और गारंटी के, यह समझौता भारत के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर करेगा।

कृषि विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने भी इस समझौते की आलोचना की है, जिसमें उन्होंने कहा है कि अमेरिकी उत्पादों के आयात में वृद्धि से भारतीय बाजारों में असंतुलन पैदा होगा और घरेलू उत्पादन प्रभावित होगा।

सरकारी अधिकारियों ने विवाद शांत करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं और किसानों से संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं विपक्षी दल भी किसानों के मुद्दों को उठाते हुए समझौते को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

इस प्रदर्शन ने एक बार फिर से यह सवाल उठाया है कि वैश्विक व्यापार समझौतों के दौरान घरेलू हितों की रक्षा कैसे की जाए और किस प्रकार से किसानों व मजदूरों की आय और उनके रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। किसानों के प्रदर्शन के चलते प्रशासन ने सुरक्षा कड़ी कर दी है और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं।

इस पूरे विवाद के बीच, किसान मजदूर मोर्चा ने साफ ऐलान किया है कि वे तब तक विरोध जारी रखेंगे जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जातीं। उनका कहना है कि इस तरह के समझौते देश के आर्थिक स्वायत्तता और ग्रामीण जीवनयापन पर भारी असर डालते हैं और इन्हें पूरा ध्यान देकर ही अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।

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