रायपुर, छत्तीसगढ़। राज्य सरकार ने स्कूलों में सुबह की असेंबली के दौरान राष्ट्रीय गान, राष्ट्रीय गीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र को शामिल करना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने इस कदम को आरएसएस के एजेंडे को राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में थोपने की कोशिश करार दिया है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, सुबह की असेंबली में ये सभी प्रार्थनाएं और गीत छात्रों में राष्ट्रभक्ति एवं सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शामिल किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे बच्चों में सांस्कृतिक पहचान और अनुशासन की भावना मजबूत होगी।
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस तरह की प्रार्थनाएं सीधे तौर पर धार्मिक आधार पर हैं, जो विभिन्न समाजों के बीच संवेदनशीलता पैदा कर सकती हैं। उनकी माने तो यह कदम शिक्षा के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को नुकसान पहुंचाने वाला है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।
रायपुर के एक स्कूल शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई शिक्षक और अभिभावक इस नई नीति से चिंतित हैं क्योंकि इससे स्कूलों में अनावश्यक तनाव और असहमति हो सकती है। उन्होंने कहा, “शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को ज्ञान देना है, न कि किसी विशिष्ट धार्मिक या सांस्कृतिक समूह के विचारों को थोपना।”
सरकार ने हालांकि, इस आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि सभी मंत्र और गान राष्ट्र और संस्कृति की एकता को दर्शाते हैं, न कि किसी एक समुदाय विशेष को। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी छात्र को उनकी धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ कोई बाधा नहीं पहुंचाई जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में शिक्षा के क्षेत्र में सांस्कृतिक समावेशिता बेहद जरूरी है। वे कहते हैं कि किसी भी धार्मिक या राजनीतिक एजेंडे को शिक्षा की पहली सीढ़ी में शामिल करना संतुलित लोकतंत्र के लिए चुनौती बन सकता है।
इस फैसले पर जनता की प्रतिक्रियाएं भी मिश्रित हैं। कुछ नागरिक इसे देशभक्ति का परिचायक मान रहे हैं, तो कुछ इसे एकतरफा और विवादस्पद फैसला बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला विधानसभा सत्र या न्यायालय में भी पहुंच सकता है, जहां इस नीति को लेकर कानूनी एवं सामाजिक बहस होगी।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक नीतियों को लेकर छत्तीसगढ़ में एक बड़ा सार्वजनिक विमर्श शुरू हो गया है। सरकार और विपक्ष के बीच यह मुद्दा जल्द ही और गरमाएगा, जिसकी पड़ताल आने वाले समय में राजनीति और समाज दोनों पर प्रभाव डालेगी।
Author: UP 24.in
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