बेंगलुरु, कर्नाटक। नीति आयोग की हालिया बैठक में ऐतिहासिक रूप से 100% राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिसमें कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार की भागीदारी ने विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया। यह बैठक राजनीतिक विविधता के बावजूद सभी प्रमुख दलों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी के लिए यादगार साबित हुई, जिससे पहले के कर्नाटक कांग्रेस शासन द्वारा अपनाए गए बहिष्कार की परंपरा टूट गई।
यह बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई थी, जहाँ कांग्रेस शासित केरल, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्यों के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाले पंजाब के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। इससे साफ जाहिर होता है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की इस बैठक में सबसे मजबूत उपस्थिति थी और विपक्षी दलों के बीच भी इस मंच की स्वीकार्यता बढ़ी है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने इस मौके पर कहा कि सभी राज्यों को प्रदेश विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए, और नीति आयोग की बैठकों में भाग लेना उनके लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने यह भी जताया कि इससे प्रदेशों को केंद्र सरकार के साथ बेहतर तालमेल बिठाने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नाटक में पिछले कांग्रेस शासन द्वारा अपनाए गए बहिष्कार नीति से वापसी का यह फैसला केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे पूर्व कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की बैठकों में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था, जिससे नीतिगत बेहतर निर्णय लेने में बाधा आ रही थी।
नीति आयोग के इस समेकित मंच पर सभी राज्यों के प्रमुखों की एक साथ मौजूदगी से राष्ट्रीय नीतियों को और अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। यह बैठक न केवल राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने का अवसर रही, बल्कि केंद्र और राज्यों के बीच पारदर्शिता व संवाद के नए द्वार भी खोलती है।
राज्य सरकारों की इस व्यापक भागीदारी को देखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में विकास कार्यों में गति आएगी और राज्यों के हितों की बेहतर पूर्ति संभव होगी। नीति आयोग के अधिकारियों ने भी इसकी सराहना करते हुए कहा कि इस स्तर की एकजुटता से भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास को मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर, नीति आयोग की इस बैठक ने यह संदेश दिया कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी राज्य और केंद्र सरकार मिलकर देश के विकास के लिए काम करने को तैयार हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार की भागीदारी ने इस बदलाव को प्रतीकात्मक रूप से सुदृढ़ किया है, जो आने वाले समय में बेहतर केंद्र-राज्य सहयोग की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।




