भारत के जलाशयों में 102 गीगावाट फ्लोटिंग सोलर पॉवर स्थापित करने की क्षमता: पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट

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India’s reservoirs can host 102 GW of floating solar, says first national assessment

नई दिल्ली, भारत

भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में अपनी बढ़ती जरुरतों को पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों को तेजी से बढ़ावा दिया है। हाल ही में प्रकाशित एक राष्ट्रीय रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के जलाशयों में फ्लोटिंग सोलर यानी तैरती हुई सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 102 गीगावाट तक की क्षमता उपलब्ध है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के लिए पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं, जो मुख्य रूप से जमीन पर स्थापित सौर पैनलों से अलग एक नई दिशा को दर्शाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत में लगभग 100 गीगावाट की सौर क्षमता स्थापित है, जिसमें ज्यादातर ग्राउंड-माउंटेड सोलर सिस्टम्स हैं। लेकिन इन ग्राउंड-माउंटेड सिस्टम्स को जितनी जगह की आवश्यकता होती है, उसके मुकाबले फ्लोटिंग सोलर पैनलों को कहीं कम जगह चाहिए। विशेष रूप से, ज़मीन पर स्थापित सौर पैनलों को प्रति मेगावाट तीन से चार गुना अधिक भूमि की आवश्यकता होती है। वहीं, पानी की सतह पर ये पैनल कम जगह घेरे हुए उच्चतम ऊर्जा उत्पादन कर सकते हैं।

फ्लोटिंग सोलर सिस्टम्स की यह खासियत न केवल भूमि संरक्षण में मदद करती है, बल्कि इस प्रकार के सौर पैनल जलाशयों की सतह पर छाया पैदा करके पानी के जलस्तर को भी स्थिर रखने में योगदान देते हैं। इससे जल वाष्पीकरण की दर भी कम होती है, जिससे जल स्रोतों को संरक्षण मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक खास कर उन क्षेत्रों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है जहाँ भूमिगत संसाधन सीमित हैं या जहाँ खेती के लिए भूमि पहले से ही अत्यधिक इस्तेमाल में है।

सरकारी एवं निजी क्षेत्र के सहयोग से अब तक फ्लोटिंग सोलर पैनलों में निवेश और परीक्षण तेजी से हो रहे हैं। कई राज्यों ने जलाशयों और बांधों पर फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की शुरुआत कर दी है। उदाहरण के तौर पर कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

रिपोर्ट यह भी सुझाव देती है कि यदि भारत अपनी जलाशयों की पूरी क्षमता का सही उपयोग कर सके, तो यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और साथ ही कार्बन उत्सर्जन को कम करने के भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा। सकल घरेलू उत्पाद और रोजगार सृजन दोनों के लिए भी यह क्षेत्र संभावनाएं लेकर आता है।

अंततः, भारत को अपनी नई ऊर्जा नीतियों में फ्लोटिंग सोलर के विकल्प को प्राथमिकता देते हुए इसे अपनी स्थायी ऊर्जा विकास योजना का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। इस पहल से न केवल ऊर्जा उत्पादन का विस्तार होगा, बल्कि समग्र पर्यावरण संरक्षण में भी लाभ होगा।

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UP 24.in
Author: UP 24.in

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