Allahabad High Court disposes of murder conviction appeal in four decades

SHARE:

Allahabad HC takes 4 decades to decide on murder conviction appeal

इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश: राज्य के उच्च न्यायालय में न्याय की धीमी प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा का विषय बनी है, जब चार दशकों में हत्या के एक मामले में आयोजित अपील का फैसला दिया गया। इस मामले ने सुप्रीम कोर्ट को भी दंग कर दिया है, जिसने प्रदेश उच्च न्यायालय की न्याय व्यवस्था में सुधार के लिए कड़ा रुख अपनाने की आवश्यकता पर पुनर्विचार करने की बात कही है।

यह मामला 1980 के दशक से न्यायालय में लंबित था, जिसमें आरोपी द्वारा हत्या का आरोप लगने के बाद निचली अदालत ने दोषसिद्धि की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील दायर की, जो चार दशकों तक लंबित रही। पिछले सप्ताह उच्च न्यायालय ने अंततः इस अपील को निपटारा करते हुए फैसले की घोषणा की।

सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रतीक्षा अवधि पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि न्याय मिलने में इस प्रकार की विलंबिता से नागरिकों का विश्वास न्याय व्यवस्था पर सेहतमंद रहता है। उच्च न्यायालय के कार्य प्रणाली में सुधार के लिए विशेष कदम उठाने की मांग उठी है जिससे इस प्रकार की लंबी प्रक्रियाएं रोकी जा सकें।

उत्तर प्रदेश के न्यायाधीशों और कानूनी विशेषज्ञों ने भी इस विषय पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जजों की संख्या में कमी, भारी अधिवक्ता और मामलों का बोझ न्यायिक प्रक्रिया को धीमा करने के मुख्य कारण हैं। इन चुनौतियों का प्रभाव आम जनता पर पड़ता है, जो न्याय पाने के लिए न्यायालयों का रुख करते हैं।

इस मामले पर कानून मंत्रालय ने भी अपनी टिप्पणी दी है और कहा है कि न्याय प्रणाली में सुधार के लिए सरकार कई योजनाएं और तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रही है। डिजिटल न्यायालय, इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सिस्टम और न्यायिक ई-ट्रैकिंग इन पहलों में शामिल हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि न्याय के नियत समय में प्रवाह और उच्च गुणवत्ता बनाए रखना आवश्यक है। लंबित मामलों में कमी लाने की प्रक्रिया में बदलाव, जजों की नई नियुक्तियां और बेहतर केस प्रबंधन तकनीकों का उपयोग आवश्यक होगा। केवल इस तरह न्यायपालिका सरकार और आम जनता के बीच विश्वास को मजबूत कर पाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर उच्च न्यायालयों में न्याय की उपलब्धता, गुणवत्ता और समय से संबंधित गंभीर प्रश्न उठाए हैं। न्याय प्रणाली के हितधारियों को मिलकर प्रेरित होकर ऐसे प्रयास करने होंगे जिससे भविष्य में इस प्रकार की विलंबित न्याय प्रक्रिया से बचा जा सके। न्याय समय ही न्याय है और समय पर न्याय मिलने से ही समाज में विश्वास बनता है।

Source

Author: