कैसे भारत की महत्वाकांक्षी योजना अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों को रोकने में असफल रही

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How India’s ambitious plan to curb unhealthy food failed

दिल्ली, भारत

भारत सरकार द्वारा अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों को नियंत्रित करने की महत्वाकांक्षी योजना, जिसे स्वास्थ्य सुधार के लिए एक बड़ा कदम माना गया था, कई चुनौतियों का सामना करते हुए अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं कर सकी है। यह योजना विशेष रूप से शक्कर और वसामयुक्त खाद्य पदार्थों पर निगरानी और नियंत्रण के लिए बनाई गई थी ताकि देश में बढ़ती मोटापे और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को रोका जा सके।

हालांकि इस योजना के तहत कई नियम और मानक स्थापित किए गए, जिनके अनुसार खाद्य उत्पादों में शामिल अतिरिक्त शर्करा की मात्रा को सीमित करना था, परन्तु बाजार में उपलब्ध उत्पादों में अभी भी अधिक मात्रा में शक्कर पाई जा रही है। उदाहरण के तौर पर, स्विस गैर-लाभकारी संस्था पब्लिक आई की रिपोर्ट में यह सामने आया है कि भारत जैसे विकासशील बाजारों में बच्चों के लिए बनाए जाने वाले कुछ नाश्ते उत्पादों में यूरोपीय बाजारों की तुलना में कहीं अधिक मात्रा में शक्कर मिलाई जाती है। यह अंतर भारत की सुरक्षा मानकों की निष्पक्षता और कड़ाई पर प्रश्न चिह्न लगाता है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण तथा भारतीय मानक ब्यूरो के दिशानिर्देशों के तहत ये उत्पाद पूरी तरह से नियमों के अनुरूप हैं। हालांकि इससे अभी भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता क्योंकि बच्चों और वयस्कों दोनों में मधुमेह, मोटापा और अन्य संबंधित बीमारियों के बढ़ते मामले इस अस्वास्थ्यकर खानपान की पुष्टि करते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि योजना के क्रियान्वयन में भेदभावपूर्ण निरीक्षण, उद्योग की अप्रत्यक्ष सहमति, और जागरूकता की कमी मुख्य बाधाएं रही हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने संसद में एक बयान के दौरान इस योजना की प्रगति की जानकारी दी है, जिसमें यह स्वीकार किया गया है कि प्रारंभिक चरण में कुछ कमियां आई हैं जिन्हें दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही यह भी ज़ोर दिया गया कि उपभोक्ताओं, विशेषकर अभिभावकों को अधिक सतर्क और जागरूक रहने की आवश्यकता है ताकि वे अपने बच्चों के खानपान को नियंत्रित कर सकें।

आरोपों के जवाब में नेस्ले इंडिया और अन्य कंपनियों ने कहा है कि वे स्थानीय नियमों का पूरी तरह पालन करती हैं और उत्पादों की गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं करती। उन्होंने यह भी कहा कि पोषण संबंधी दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए उत्पादों का निर्माण किया जाता है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केवल कानूनी नियम पर्याप्त नहीं होंगे; इसके लिए स्वस्थ खानपान को बढ़ावा देने वाली शिक्षा और व्यापक जागरूकता अभियानों की जरूरत है जो कि भारत जैसे विशाल और विविध देश में अधिक प्रभावशाली साबित हो सके।

भारत सरकार के लिए यह चिंता का विषय है कि कैसे इस योजना को प्रभावी बनाया जाए ताकि भविष्य में स्वस्थ आहार को बढ़ावा देकर नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार किया जा सके।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

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