थिरुवनंतपुरम, केरल – केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतिशन ने बुधवार को घोषणा की कि राज्य में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) सरकार पूर्व की वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार द्वारा घोषित सिल्वरलाइन अर्ध-उच्च-गति रेलवे परियोजना को खत्म कर रही है।
यह परियोजना केरल के दक्षिणी हिस्से के त्रिवेंद्रम से लेकर उत्तर में कसारगोड तक लगभग 530 किलोमीटर की दूरी को कवर करती थी। इससे वर्तमान 12 से 14 घंटे की यात्रा अवधि घटाकर चार घंटे से भी कम समय में की जा सकती थी।
यह परियोजना K-रेल नामक एक संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित की जानी थी, जिसमें केरल सरकार और रेलवे मंत्रालय दोनों की हिस्सेदारी थी।
मुख्यमंत्री सतिशन ने यह भी बताया कि इस परियोजना के विरोध में दर्ज आरोपों को वापस लिया जाएगा और इसके लिए सरकार न्यायपालिका से सहायता मांगेगी।
उन्होंने कहा, “परियोजना के लिए जो भूमि अधिगृहित की गई थी, उसे कभी डीनोटिफाई नहीं किया गया, जिसकी वजह से लोग अपनी संपत्ति न तो बेच पाए और न ही उसे गिरवी रख पाए।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उच्च गति रेल परियोजनाओं के विरोध में नहीं हैं, परंतु के-रेल परियोजना पर्यावरण के लिए हानिकारक और आर्थिक रूप से असंभव थी। सतिशन ने कहा, “हम ऐसी रेल परियोजना के पक्ष में हैं जो राज्य के पर्यावरण या वित्तीय स्थिति को प्रभावित न करे।”
यह परियोजना 2022 से उस समय ठप हो गई थी जब केंद्र सरकार की मंजूरी लंबित थी और राज्य में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे।
परियोजना के आलोचकों ने चेतावनी दी थी कि इससे हजारों लोगों का विस्थापन हो सकता है और पर्यावरणीय दुष्प्रभाव गंभीर होंगे।
केरल सरकार की यह नई नीति इस बात का संकेत देती है कि राज्य सरकार सामाजिक और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील है।
सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी परियोजनाएं तभी पूरी होंगी जब वे पारिस्थितिक संतुलन को बाधित न करें और जनता के हित में हों।
Author: UP 24.in
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