ताइवान अधिकारियों ने भारत-विरोधी लोकल चुनाव अभियान की निंदा की

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Taiwan officials condemn anti-India local polls campaign

नई दिल्ली, भारत

ताइवान की प्रतिनिधि कार्यालय ने बुधवार को एक स्थानीय चुनाव प्रचार में भारत-विरोधी तत्वों की निंदा की है। यह मामला काऊशींग सियाओगैंग जिले में एक वार्ड प्रमुख द्वारा लगाए गए एक विवादित चुनावी बिलबोर्ड को लेकर सामने आया, जिसमें भारतीय ध्वज के उल्टे होने के साथ-साथ एक भूरे रंग के व्यक्ति को पगड़ी पहने हुए दर्शाया गया था। इस बिलबोर्ड को देखकर सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और इसे जातिवादी और भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है।

यह विवादित बिलबोर्ड ली हुङ-यी नाम के एक स्वतंत्र उम्मीदवार ने अपने चुनाव प्रचार के लिए लगाया था, जो नवंबर में होने वाले काऊशींग सिटी काउंसिल के चुनाव में खड़े हैं। ली के इस कदम ने सामाजिक स्तर पर काफी विवाद को जन्म दिया, जिसके चलते ताइवान की नई दिल्ली स्थित प्रतिनिधि कार्यालय को इस घटना पर प्रतिक्रिया देनी पड़ी।

ताइवान की प्रतिनिधि कार्यालय ने स्पष्ट किया कि उक्त विवादास्पद टिप्पणी और पोस्टर उनके आधिकारिक रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करते। उन्होंने कहा कि ताइवान प्रत्येक प्रकार के पूर्वाग्रह, जातिवाद और भेदभाव का कड़ा विरोध करता है। यह देश लोकतंत्र, समावेशिता और विविधता के मूल्यों को अत्यंत महत्व देता है और भारत के साथ सम्मानजनक और सकारात्मक जनसम्पर्क को प्रोत्साहित करता है।

ली हुङ-यी ने सोशल मीडिया विवाद के बाद एक बयान में कहा कि वे पूरे विदेशी कामगारों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि विशेष रूप से भारत से आने वाले प्रवासी श्रमिकों के प्रति अपनी आपत्तियां व्यक्त कर रहे हैं। उनका मानना है कि ताइवान में भारतीय प्रवासी श्रमिकों को शामिल करने के लिए उपयुक्त प्रबंधन और नियमावली का अभाव है, जिससे कार्यव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

इस विवाद के बीच, श्रम मंत्री हुङ सुन-हान ने अप्रैल में यह भी कहा था कि ताइवान में विदेशी श्रमिकों की संख्या को लेकर कई नीतिगत सुधार किए जा रहे हैं। ताइवान सरकार प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों और उनके उचित प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि दोनों देशों के बीच सहयोग सही दिशा में जारी रहे।

इस पूरे मामले ने भारत और ताइवान के बीच सामाजिक और राजनीतिक संबंधों की संवेदनशीलता को उजागर किया है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ रहे हैं, और ऐसे विवादों को संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ताइवान द्वारा इस तरह की निंदात्मक कार्रवाई की कड़ी निंदा से यह स्पष्ट होता है कि वे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के पक्ष में हैं और किसी भी जातिगत या सांप्रदायिक भेदभाव को सहन नहीं करेंगे।

समाज के विभिन्न वर्गों से भी इस घटना की कड़ी आलोचना हो रही है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर ज्यादा सतर्कता और पारदर्शिता बरती जाएगी। चुनौतियों के बावजूद, ताइवान और भारत के बीच दोस्ताना और सहयोगी संबंधों को और मजबूती प्रदान करने की दिशा में दोनों पक्ष प्रतिबद्ध हैं।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

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