सरकार के 45 दिनों के एलपीजी ‘रोलिंग स्टॉक’ के दावे पर एक वास्तविकता जांच

SHARE:

A reality check on govt.’s claim of 45 days of LPG ‘rolling stock’

नई दिल्ली, भारत – सरकार द्वारा एलपीजी सिलेंडरों के 45 दिनों के ‘रोलिंग स्टॉक’ उपलब्ध कराने के दावे को लेकर बाजार और आम लोगों में उत्सुकता देखी गई है। इस दावे के अनुसार, देश में गैस सिलेंडरों की उपलब्धता लगातार बनी रहेगी और किसी भी प्रकार की कमी नहीं होगी। हालांकि, इस दावे की सत्यता के लिए हमने विभिन्न स्रोतों और विशेषज्ञों से बात की है।

सरकार ने दो महीने पूर्व घोषणा की थी कि देश में एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त भंडार है और अगले 45 दिनों तक किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने पाएगी। यह कदम कोविड-19 महामारी के दौरान घरेलू रसोई गैस की सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए अहम माना गया था। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य था कि लॉकडाउन या अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों में भी उपभोक्ता गैस से वंचित न रहें।

गैस वितरकों और उपभोक्ताओं के अनुसार, हाल के महीनों में कई इलाकों में एलपीजी गैस की सप्लाई में व्यवधान देखें गए हैं। कई ग्राहकों ने बताया कि वे कई दिन तक सिलेंडर के लिए प्रतीक्षा करते रहे, जबकि आधिकारिक डेटा में इस बात की जानकारी नहीं मिली। कुछ दुकानदारों का कहना है कि सप्लाई नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरन मार्केट से अधिक दामों में सिलेंडर खरीदना पड़ता है।

विशेषज्ञों का भी कहना है कि ‘रोलिंग स्टॉक’ का अर्थ होता है कि जितना सिलेंडर उपयोग हो उसका बराबर भंडारण हर समय मौजूद रहे। उन्होंने इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकारों, वितरण एजेंसियों और आपूर्ति श्रृंखला के कुशल प्रबंधन की आवश्यकता बताई है। अगर कहीं भी तंत्र में बाधा आई तो सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

सरकारी अधिकारियों ने न्यूज़ एजेंसी को बताया कि 45 दिनों का स्टॉक केवल एक अनुमान आधारित योजना है, और वास्तविकता में संपूर्ण देशभर में इसे नियमित बनाए रखना चुनौतिपूर्ण होता है, खासतौर पर श्रम संकट, परिवहन बाधाएं और मांग में अचानक वृद्धि के चलते। वे आश्वस्त कराते हैं कि हर संभव प्रयास किया जा रहा है ताकि आम जनता को गैस की सुविधा अविरल मिलती रहे।

एलपीजी बाजार के हालिया रुझानों को देखें तो घरेलू गैस सिलेंडर की खपत में बढ़ोतरी हुई है, जो कोरोना के बाद रसोई घरों के अधिक उपयोग से संबंधित है। इसके साथ ही, उद्योग जगत में भी गैस की मांग में वृद्धि का असर आपूर्ति पर पड़ा है।

सरकारी प्रयासों के बावजूद, कुछ विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि बेहतर ट्रैकिंग सिस्टम, डिजिटलाइजेशन और स्थानीय स्तर पर आपूर्ति की सतत निगरानी से ही गैस वितरण सुचारू रूप से संभव हो सकेगा। इसके बिना ’45 दिनों के रोलिंग स्टॉक’ का दावा केवल एक योजना ही रह जाएगा।

इस रिपोर्ट के आधार पर यह कहा जा सकता है कि सरकार का एलपीजी सिलेंडर के 45 दिनों के स्टॉक को लेकर दिया गया दावा सही दिशा में एक प्रयास जरूर है, परन्तु इसे वास्तविकता में ढालने के लिए समन्वय और सुविधाजनक वितरण व्यवस्था अनिवार्य है। आम नागरिकों को गैस आपूर्ति के वैकल्पिक विकल्पों पर भी ध्यान देना चाहिए ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में घरों की रसोई न ठहर सके।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

News

सबसे ज्यादा पड़ गई