चेन्नई, तमिलनाडु। मद्रास उच्च न्यायालय ने टीवीके प्रमुख विजय की संपत्ति की जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन ने इस मामले में नई याचिका को खारिज कर दिया क्योंकि उन्होंने पहले ही इसी विषय पर एक समान रिट याचिका में नोटिस जारी कर दिया था।
यह निर्णय मंगलवार को सुनाया गया, जिसमें कोर्ट ने कहा कि इससे जुड़े समान मुद्दे पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन हैं और इसीलिए नई याचिका को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया और चल रही जांचों में हस्तक्षेप न करने की जरूरत है।
टीवीके प्रमुख के खिलाफ संपत्ति जांच की मांग पुरानी है और विभिन्न सामाजिक तथा राजनीतिक गुट इस विषय पर लगातार अदालत से निष्पक्ष जांच की उम्मीद लगाए हुए थे। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि समान मामलों को एक साथ देखना उपयुक्त होगा और इसलिए पहले से लंबित याचिका का परिणाम प्रतीक्षा करना चाहिए।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि यह एक न्यायिक प्रथा है कि समान प्रकृति के मामलों को एक-साथ देखने से न्यायिक संसाधनों की दक्षता बढ़ती है और न्यायालयिक निर्णयों की एकरूपता बनी रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे कानून के तहत पक्षकारों को उचित अवसर मिलेगा।
सामाजिक समूहों ने इस निर्णय को निराशाजनक बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर त्वरित और पारदर्शी जांच की आवश्यकता है। हालांकि, पक्ष के वकीलों का कहना है कि न्यायालय का यह रुख उचित है और इससे किसी भी तरह की जल्दबाजी में फैसले से बचा जा सकेगा।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि इस मामले से संबंधित सभी पक्ष अपनी दलीलें पहले से लंबित याचिका में प्रस्तुत करें ताकि उचित निर्णय जल्द से जल्द लिया जा सके।
मद्रास उच्च न्यायालय का यह निर्णय राजनीतिक और सामाजिक सुर्खियों में बना हुआ है, और इससे संबंधित तमाम जानकार कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर नजर बनाए हुए हैं। इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि न्यायालय निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया के नियमों का पालन करते हुए मामले की जांच करेगा।
Author: UP 24.in
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