ग्वालियर, मध्य प्रदेश – सतत विमान ईंधन (Sustainable Aviation Fuel – SAF) के क्षेत्र में इथेनॉल के उपयोग को लेकर हाल ही में विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा की हैं। इथेनॉल, जो एक बायोयुरीय ईंधन के रूप में प्रसिद्ध है, अब विमानन उद्योग में भी एक स्थायी और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में उभर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल को सुरक्षित रूप से जेट इंजन में सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है क्योंकि यह जेट इंजन के संचालन को प्रभावित कर सकता है। यह मुख्य रूप से इसलिए होता है क्योंकि कच्चा इथेनॉल नमी को अवशोषित करता है, जो ईंधन लाइनों को जाम कर सकता है और इंजन की थ्रस्ट में कमी ला सकता है। लेकिन ATJ (Alcohol-to-Jet) प्रक्रिया इन समस्याओं का समाधान देती है।
ATJ तकनीक द्वारा कच्चे इथेनॉल को रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से टिकाऊ विमान ईंधन में परिवर्तित किया जाता है, जो नमी अवशोषित नहीं करता और जेट इंजन के लिए पूरी तरह से उपयुक्त होता है। इससे न केवल इंजन की कार्यक्षमता बनी रहती है, बल्कि ईंधन के कारण होने वाली किसी भी प्रकार की बाधा या थ्रस्ट में गिरावट की संभावना भी समाप्त हो जाती है।
वायुयान उद्योग में SAF के बढ़ते उपयोग से न केवल तेल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि हरीHOUSE गैस उत्सर्जन में भी कमी आएगी, जो कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि ATJ प्रक्रिया ने इथेनॉल को विमानन ईंधन के क्षेत्र में एक सक्षम विकल्प बना दिया है, जिससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा और विमानन की ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी।
सरकार और कई निजी संगठन सतत विमान ईंधन के विकास और उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे तेजी से इस क्षेत्र में अनुसंधान और निवेश बढ़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप, आने वाले वर्षों में इथेनॉल आधारित SAF तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग संभव होगा, जो विमानन उद्योग को अधिक हरित और स्थायी बनाएगा।
इस प्रकार, ATJ प्रक्रिया इथेनॉल को ऐसे विमान ईंधन में परिवर्तित करती है जो न केवल पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार है, बल्कि विमान की तकनीकी दक्षता को भी प्रभावित नहीं करता। यह मिश्रण भले ही प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करता है, लेकिन ईंधन की विश्वसनीयता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।




