20,000 विज्ञापन, 2,60,000 उत्पाद: रिपोर्ट में मेटा के वन्यजीव तस्करी बाजार का खुलासा

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20,000 ads, 2,60,000 products: Report exposes Meta's wildlife trafficking market

Mumbai, Maharashtra

हाल ही में जारी एक विस्तृत रिपोर्ट में मेटा के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वन्यजीव तस्करी की एक विशाल और संगठित दुकान का पर्दाफाश हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, मेटा के विभिन्न सोशल मीडिया चैनलों पर लगभग 20,000 विज्ञापन और 2,60,000 से अधिक ऐसे उत्पाद सूचीबद्ध हैं, जो वन्यजीवों से जुड़े अवैध व्यापार और तस्करी को बढ़ावा देते हैं।

यह रिपोर्ट दुनिया भर के विशेषज्ञों और जांचकर्ताओं ने मिलकर तैयार की है जिनका उद्देश्य इंटरनेट पर चल रहे अवैध व्यापार की जाँच करना है। खासकर वह व्यापार जो दुर्लभ और असामान्य जीव-जंतुओं के अवैध शिकार और बिक्री में शामिल है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तस्करी न केवल वन्यजीवों की रक्षा को खतरे में डालती है, बल्कि जैव विविधता को भी स्थायी नुकसान पहुंचाती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मेटा ने इस समस्या पर लगातार काम करने का आश्वासन दिया है, लेकिन सुविधाजनक आवेदन और व्यापक पहुंच के कारण तस्कर लगातार नए-नए तरीका खोजते रहते हैं। इसके चलते उनकी गतिविधियाँ कभी-कभी पकड़ से बाहर होती हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि कंपनियों को और अधिक प्रभावी मॉनिटरिंग तथा सख्त नीतियां अपनानी होंगी ताकि इस प्रकार की तस्करी को रोकना सुनिश्चित हो सके।

गौरतलब है कि वन्यजीवों से जुड़ी तस्करी केवल सांस्कृतिक, आर्थिक या पर्यावरणीय दृष्टि से ही गंभीर नहीं है, बल्कि यह अपराधी नेटवर्क के लिए भी आय का बड़ा स्रोत है जो सीमा पार होकर काम करते हैं। ये नेटवर्क ग्लोबल स्तर पर सक्रिय हैं और इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म इसका सबसे बड़ा संवाहक बन गए हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस मामले में सिर्फ तकनीकी निगरानी ही नहीं, बल्कि कड़ी कानूनी कार्रवाइयों और समुदायों को जागरूक करने की भी आवश्यकता है। इसके बिना वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को सफलता मिलना मुश्किल होगा।

मेटा की ओर से अभी इस रिपोर्ट पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन वन्यजीव संरक्षण संस्थाएं और सरकारी एजेंसियां इस विषय को लेकर और कड़े कदम उठाने की मांग कर रही हैं।

आगे चलकर यह देखना होगा कि डिजिटल प्लॅटफॉर्मों पर वन्यजीवों के अवैध व्यापार को रोकने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं और किस हद तक ये प्रयास प्रभावी साबित होते हैं। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए यह लड़ाई अब तकनीक और कानून दोनों के स्तर पर निर्णायक साबित होगी।

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UP 24.in
Author: UP 24.in

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