राजौरी, जम्मू-कश्मीर। ‘ऑपरेशन शेरुवाली’, जो एक बड़ी आतंक-विरोधी मुहिम है, राजौरी के घने जंगलों में 38वें दिन भी जारी है। सुरक्षा बल आतंकवादियों का पीछा कर उन्हें काबू करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। इस ऑपरेशन के तहत अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल और जमीन स्तर पर समन्वित कार्रवाई की जा रही है ताकि क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सुरक्षा बलों की इस व्यापक मुहिम का मकसद न केवल आतंकियों को समाप्त करना है, बल्कि इलाके में स्थायी शांति स्थापित करना भी है। ऑपरेशन के दौरान, आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार सर्च और सर्विलांस अभियान चलता रहा है। सुरक्षा बलों ने इलाके में नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा है।
इससे पहले, लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के समीप एक पेट्रोल के दौरान एक दुर्घटनावश खदान फटने से चार जवान घायल हो गए थे। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। यह घटना ऑपरेशन की जटिलता और खतरे को दर्शाती है, जिसके बावजूद सुरक्षा बलों का मनोबल ऊंचा है।
सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन में नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें ड्रोन, थर्मल इमेजिंग और हाई-टेक संचार उपकरण शामिल हैं। इन सबके माध्यम से आतंकवादियों के छिपने के स्थान का पता लगाना और उन्हें पकड़ना आसान हो रहा है। वहीं, स्थानीय लोगों को भी इस अभियान में सहयोग करने के लिए जागरूक किया गया है।
राजौरी क्षेत्र, जो आतंकवादियों के लिए एक महत्वपूर्ण ठिकाना माना जाता था, वहां इस ऑपरेशन की वजह से काफी बदलाव आया है। सुरक्षा बलों के सतत प्रयासों से इलाके में आतंकवाद के प्रभाव को कम करने में सफलता मिली है। प्रशासन ने भी पीड़ित परिवारों को सहायता प्रदान की है और पुनर्वास कार्यक्रम शुरू किए हैं।
कुल मिलाकर, ‘ऑपरेशन शेरुवाली’ की यह 38वीं दिन की लड़ाई आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस अभियान से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक पूरी तरह से इलाके से सभी आतंकियों को समाप्त नहीं कर दिया जाएगा। यह मिशन क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Author: UP 24.in
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