चेन्नई, तमिलनाडु। मद्रास उच्च न्यायालय ने नाटकीय संगम चुनाव से जुड़ी एक याचिका पर आदेश सुरक्षित कर लिया है। न्यायमूर्ति ए.डी. मारिया क्लेट ने 2022 में चुने गए पदाधिकारियों की 2028 तक सेवा अवधि को चुनौती देते हुए दायर मुकदमे को अस्वीकार करने की याचिका पर सुनवाई पूरी की और अब इस पर अपना फैसला 1 जुलाई को सुनाने का निर्णय लिया है।
यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें 2022 में निर्वाचित पदाधिकारियों की सेवा अवधि को लेकर विवाद उठाया गया था। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि वर्तमान पदाधिकारी अपने कार्यकाल को अनुचित रूप से बढ़ा रहे हैं, जो संगठन की आचार संहिता और चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ है।
न्यायालय की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए। प्रतिवादी पक्ष ने कहा कि पदाधिकारियों का कार्यकाल संगठन के संविधान एवं संबंधित नियमों के अनुसार वैध है और किसी भी प्रकार का उल्लंघन नहीं हुआ है। वहीं याचिकाकर्ता पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि औपचारिक चुनाव प्रक्रिया को दरकिनार कर निरस्त अवधि का विस्तार अनुचित है एवं इससे संगठन की कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न हो रही है।
मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की गहराई से जांच करते हुए सभी पहलुओं पर विचार किया और अब 1 जुलाई को अपना अंतिम फैसला सुनाने की घोषणा की है। इससे पहले न्यायालय ने सभी दस्तावेज़ों और गवाहों के बयानों को ध्यान से सुना और दोनों पक्षों को पूर्ण सुनवाई का मौका दिया।
नाटकीय संगम जैसे महत्वपूर्ण संगठन के चुनाव मामलों में न्यायालय का यह फैसला संगठन की वैधानिकता एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नाटकीय संगम तमिल फिल्म उद्योग के सदस्यों का प्रतिनिधित्व करता है और इसके चुनाव परिणामों का प्रभाव पूरे उद्योग पर होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से न केवल संबंधित पदाधिकारियों की वैधता की पुष्टि होगी, बल्कि यह भविष्य में ऐसे विवादों को भी कम करने में सहायक होगा। सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अदालतों का यह रुख एक सकारात्मक संकेत है।
1 जुलाई को सुनाया जाने वाला यह निर्णय नाटकीय संगम के भविष्य को स्पष्ट करेगा और तमिल फिल्म उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण सबक साबित होगा।
Author: UP 24.in
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