2023 में महिलाओं के विधेयक के पारित होने के बाद से 20 विधानसभा चुनावों में केवल 10.2% महिलाएं मैदान में उतरीं: रिपोर्ट

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Only 10.2% women fielded in 20 Assembly polls since passage of women’s Bill in 2023: report

नई दिल्ली, भारत – आगामी 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए जब आधारभूत विश्लेषण किया गया, तो यह तथ्य सामने आया कि कुल 8,360 उम्मीदवारों में से केवल 800 अर्थात् 9.6% महिलाएं थीं। यह आंकड़ा महिला भागीदारी की कमी को उजागर करता है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार, भारत के 543 संसदीय क्षेत्रों में से 152 क्षेत्रों में महिलाओं के उम्मीदवार नदारद थे। यह एक बड़ी संख्या है, जो लगभग 28% के बराबर है। इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि अभी भी कई हिस्सों में महिलाओं को राजनीति में उतरने के लिए उचित अवसर नहीं मिल रहे हैं या सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बाधाएं उन्हें रोकती हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए किए गए प्रयास अभी भी अपर्याप्त हैं। महिलाओं के उम्मीदवार कम होने का कारण कई हैं जैसे कि चुनावी खर्च, राजनीतिक पार्टीयों द्वारा उम्मीदवारों के चयन में भेदभाव, सामाजिक रूढ़िवादिता और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि राजनीतिक दल महिलाओं को अधिक मौके दें और उन्हें चुनावी मैदान में उतारने के लिए प्रोत्साहित करें। इसके साथ ही, महिलाओं के लिए प्रशासनिक और कानून प्रक्रिया को सरल बनाने की भी जरूरत है जिससे वे बिना किसी बाधा के चुनाव लड़ सकें।

वास्तव में, लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से होता है। महिला सशक्तिकरण से ना केवल समाज बल्कि संपूर्ण देश का विकास होता है और सरकार द्वारा महिलाओं की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

इस रिपोर्ट के प्रकाश में यह आवश्यक है कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर ऐसे कानून और नीतियां बनाए जो महिलाओं को राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश करने और सफल होने के लिए पूरी सहायता दें। इस दिशा में समय रहते सुधार करना लोकतंत्र की गुणवत्ता को बढ़ाने में सहायक होगा।

निष्कर्षतः, आगामी लोकसभा चुनावों में महिलाओं की संख्या ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि समावेशी लोकतंत्र के लिए किस कदर कार्य करने की आवश्यकता है ताकि महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो और वे संस्थागत स्तर पर भी बराबर की भूमिका निभा सकें।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

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