‘बैकरूम्स’ मूवी समीक्षा: केन पार्सन्स का पोस्टमॉडर्न भूलभुलैया इंटरनेट युग के भयावह अनुभवों का मंत्रमुग्ध कर देने वाला मूडबोर्ड है

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‘Backrooms’ movie review: Kane Parsons’ postmodern labyrinth is a mesmerising moodboard for the horrors of the internet age

नयी दिल्ली, भारत

इंटरनेट की दुनिया में मशहूर शहरी किंवदंतियों को जब कोई सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत करता है तो उसकी कल्पना और दृश्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। केन पार्सन्स की फिल्म ‘बैकरूम्स’ ऐसी ही एक फिल्म है, जिसने पूरे इंटरनेट युग के अजूबों और भयावह अनुभवों को एक कहानी के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। यह फिल्म एक संवेदनात्मक सपना जैसा अनुभव कराती है, जो यादों और पुरानी भावनाओं के बीच के एक बहुमूल्य और रहस्यमय सफर पर ले जाती है।

इस फिल्म का मुख्य आकर्षण इसका पोस्टमॉडर्न स्टाइल है, जो पारंपरिक हॉरर फिल्मों से बिल्कुल अलग है। पार्सन्स ने इसे एक भूलभुलैया की तरह डिजाइन किया है जहाँ देखने वाला हर पल एक नए रहस्य और नए डर से रूबरू होता है। ‘ड्रीमकोर हॉरर’ के रूप में यह फिल्म शक्ति और भय का मिश्रण प्रस्तुत करती है, जो इसे केवल एक हॉरर फिल्म से कहीं अधिक बनाता है।

फिल्म की कहानी एक रहस्यमई जगह के इर्द-गिर्द घूमती है जिसे बैकरूम कहा जाता है, जो एक अनंत भूलभुलैया की तरह होती है। यह जगह उन सूखों, खोई हुई यादों, और इंटरनेट के डूबते हुए समय के प्रतीक के रूप में दिखती है। पार्सन्स ने अपनी निर्देशन शैली में ऐसी भावनाओं को जीवंत किया है जो दर्शक के मन में अनजाने डर और उत्सुकता दोनों को जगाते हैं।

‘बैकरूम्स’ की खासियत इसका सिनेमाटोग्राफी और ध्वनि प्रभाव है, जो इस भूलभुलैया के वातावरण को और भी डरावना और रहस्यमय बनाते हैं। फिल्म का हर दृश्य और हर ध्वनि एक गहरे अनुभव का हिस्सा लगती है, जो दर्शकों को अपने साथ बांध लेती है। यही वजह है कि यह फिल्म केवल हॉरर प्रेमियों के लिए नहीं, बल्कि उन सभी के लिए भी एक अनूठा अनुभव है जो इंटरनेट युग की भावनाओं और डर को समझना चाहते हैं।

इंटरनेट की तेज़ गतिशीलता और डिजिटल यादों के अस्थिर प्रवाह को दर्शाते हुए इस फिल्म ने एक नया स्तर स्थापित किया है। केन पार्सन्स ने इस फिल्म के जरिये न सिर्फ एक कहानी सुनाई है बल्कि इंटरनेट युग के मानसिक और भावनात्मक परतों को खोलकर दिखाया है। नतीजतन, ‘बैकरूम्स’ एक ऐसा हॉरर अनुभव है जो लंबे समय तक दर्शकों के दिमाग में बना रहता है।

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UP 24.in
Author: UP 24.in

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