परम एकादशी 2026 व्रत कथा, तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पारण समय और महत्व

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Parama Ekadashi 2026 vrat katha, date, shubh muhurat, puja vidhi, paran timings and significance

वडोदरा, गुजरात

परम एकादशी का व्रत हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे आधिक मास के दौरान किया जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 11 जून को मनाया जाएगा, जो इनमें से एक प्रमुख एकादशी है। इस दिन उपवास करने वाले भक्तों को समृद्धि और आध्यात्मिक लाभ की प्राप्ति होती है।

परम एकादशी की कथा बहुत ही मार्मिक है, जो हमें सत्यनिष्ठा और भक्ति की महत्ता बताती है। कथा के अनुसार, सुमेधा और पवित्रा नामक एक गरीब दंपति था, जिनकी कठिन परिश्रम और विश्वास ने उन्हें भगवान विष्णु का अनुग्रह दिलाया। गरीबी में जीते हुए भी उनका मन सदैव प्रभु की भक्ति में रमा रहता था। भगवान विष्णु ने उनकी भक्ति से मूवित होकर उन्हें आशीर्वाद दिया और उनकी जीवन परिस्थितियां बदल गईं। इस कथा से सिखने को मिलता है कि सच्चे मन से किए गए व्रत और भक्ति से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

परम एकादशी के दिन सुबह से ही पूजा का शुभ मुहूर्त शुरू हो जाता है। भक्त व्रत रखते हैं और मंदिरों में जाकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। पूजा विधि में सबसे पहले स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करना आवश्यक है। तत्पश्चात देवता की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर, धूप, अक्षत, गुलाब जल चढ़ाकर भगवान की आरती की जाती है। इसके बाद व्रत कथा का पाठ किया जाता है जो उपवास के महत्व को स्पष्ट करती है।

पारण का समय भी विशेष होता है और इसे सावधानीपूर्वक देखा जाता है ताकि व्रत पूर्णतया सिद्ध हो सके। पारण का सही समय आधिक मास की समाप्ति के बाद निर्धारित किया जाता है। इसके बाद भक्त दाल, अनाज और अन्य सात्विक भोजन ग्रहण करके अपने व्रत को पूर्ण करते हैं।

परम एकादशी का व्रत समृद्धि, सुख-शांति और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है। यह व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी लाभकारी है। भक्त जन विश्वास करते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु की उपासना से उनके सभी दुःख समाप्त होते हैं और जीवन में नवenergia आती है। इसीलिए यह व्रत विशेष आस्था के साथ मनाया जाता है।

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UP 24.in
Author: UP 24.in

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