जुर्गेन हाबर्मास (1929-2026): नागरिक और सार्वजनिक स्व की यूटोपियन सोच

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Jürgen Habermas (1929-2026): The utopian thinker’s intuitions for the civic and the public self

दिल्ली, भारत

जुर्गेन हाबर्मास, एक महान दार्शनिक और समाजशास्त्री, जिन्होंने सार्वजनिक और नागरिक स्व की यूटोपियन सोच को जन-जन तक पहुँचाया, का हाल ही में निधन हो गया है। उनकी विद्वता और उदार विचारधारा ने समकालीन राजनीतिक और दार्शनिक विमर्श को नए आयाम दिए। हाबर्मास ने यह सवाल उठाया कि आज के युग में भी, जब हम राज्य की मशीनों के कानूनी और राजनीतिक अधीन हैं, हमें एक रैडिकल स्वतंत्रता का अभ्यास करने के कौन-कौन से संसाधन उपलब्ध हैं।

उनके विचारों को कुछ आलोचक केवल दार्शनिक सिद्धांत मानते थे, जिसमें वास्तविकता का कोई संबंध नहीं है, लेकिन हाबर्मास ने इन प्रश्नों के माध्यम से हमें एक नई समझ दी। उन्होंने हमें यह सिखाया कि हम अपनी जाति, धर्म, समुदाय आदि की बंधनों से परे जाकर, एक दूसरे और स्वयं का उत्सव मना सकते हैं। यह विचार कि हम अजनबियों के साथ भी पूरी तरह से मौजूद रह सकते हैं, उनकी एक अनोखी दृष्टि थी।

मेरे लिए हाबर्मास एक यूटोपियन विचारक थे। उन्होंने ये दिखाया कि लोकतांत्रिक स्व और अजनबी-सामाजिकता के अभ्यास से हमें कुछ हद तक स्वतंत्रता प्राप्त हो सकती है।

एक व्यावहारिक सूत्र

मेरे शिक्षक बर्नार्ड बेट से मैंने हाबर्मास के विचारों की शक्ति को जाना, जिन्होंने दक्षिण भारतीय, तमिल भाषा और सामाजिक परिदृश्य में सार्वजनिक भाषण संस्कृतियों पर प्रसिद्ध लेख लिखा। बेट की जानकारी के अनुसार, हाबर्मास की विचारधारा जाति, धर्म और समुदाय के बंधनों को खोलने और भारत के उपनिवेशोत्तर जुगाड़ में सार्वजनिक सिद्धांत को लागू करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली थी।

हाबर्मास ने यह भी प्रस्तावित किया कि किस प्रकार हम नागरिक अधिकारों और सार्वजनिक संवाद को बढ़ावा देकर समाज में न्यायसंगत और स्वतंत्र बहस को विकसित कर सकते हैं। उनके सिद्धांत ने लोकतंत्र, मानवाधिकार, और सार्वजनिक सक्रियता के क्षेत्र में गहरा प्रभाव डाला।

उनका योगदान न केवल सामाजिक विज्ञानों में बल्कि राजनीतिक दार्शनिकता में भी अमूल्य था। उन्होंने हमारी सोच को चुनौती दी कि कैसे निजी और सार्वजनिक स्व के बीच सम्बन्ध स्थापना की जा सकती है।

हाबर्मास के विचारों से प्रेरणा लेकर, आज भी अनेक शोधकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता भारत में सामाजिक न्याय और समानता के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उनकी शिक्षाएँ वैश्विक स्तर पर लोकतांत्रिक संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक प्रकाशस्तंभ की तरह काम करती हैं।

हाबर्मास के निधन से हमारा विचार क्षेत्र एक महान विचारक से वंचित हो गया है, लेकिन उनके विचार और शिक्षाएँ सदैव प्रासंगिक रहेंगी। उनकी विरासत से हम सीख सकते हैं कि कैसे हम अपने सामाजिक और राजनीतिक बंधनों को पार कर, एक नया और समावेशी समाज बना सकते हैं।

जुर्गेन हाबर्मास के विचार आज भी हमें प्रेरणा देते हैं कि हम कैसे अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए एकजुट होकर, एक न्यायसंगत और संवादपरक दुनिया का निर्माण करें।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

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