बंद पर खुला: तमिलनाडु में शराब की दुकानों की बंदी

SHARE:

Shut but open | T.N.’s closure of liquor shops

चेन्नई, तमिलनाडु

प्रत्येक बार जब कोई नई पार्टी सत्ता में आती है, तो शराब की दुकानों को बंद करने का वादा सबसे पहले किया जाता है। यह एक ऐसा विषय है जो राजनीतिक पार्टियों के चुनावी मंचों पर अक्सर उभरता है। तमिलनाडु में भी ऐसा ही देखा गया है, जहां सत्ता परिवर्तन के बाद शराब की दुकानों को बंद करने की घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन बाद में वे अन्य स्थानों पर पुनः खोल दी जाती हैं।

हाल ही में तमिलागा वेट्री कषगम सरकार ने 717 शराब की दुकानों को शिक्षण संस्थानों और पूजा स्थलों के निकटवर्ती इलाकों से बंद करने का फैसला किया है। यह कदम समाज में व्याप्त शराब की समस्या को कम करने और शिक्षा तथा धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के मकसद से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार के इस निर्णय को लेकर जनता और विशेषज्ञों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। एक ओर जहां कई लोग इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ का मानना है कि दुकानों को बस दूसरी जगह शिफ्ट कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा।

शराब की दुकानों के बंद होने से आस-पास के इलाकों में सुरक्षित और शांत माहौल बनेगा, यह उम्मीद की जा रही है। खासकर शिक्षा और धार्मिक केंद्रों के नजदीक शराब का सेवन और बिक्री कम होगी, जिससे युवा वर्ग और आम जनता साफ-सुथरे परिवेश में रह सकेंगे।

तब भी, यह सवाल उठता है कि क्या यह बंदी स्थायी होगी या फिर जल्द ही कुछ नए स्थानों पर ही शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इस विषय पर विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बंद करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसके साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रम, सख्त निगरानी और वैकल्पिक रोजगार के अवसर भी प्रदान किए जाने जरूरी हैं।

सरकार का यह कदम निश्चित ही एक महत्वपूर्ण पहल है, खासकर सामाजिक व शैक्षिक दृष्टिकोण से, लेकिन इसका प्रभाव तभी स्थायी होगा जब इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और जनता के सहयोग से इसे सफल बनाया जाए। तमिलनाडु के नागरिक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि क्या यह बंदी सच में शराब की दुकानों की संख्या कम करने में सहायक होगी या फिर इतिहास की तरह यह भी केवल समय भर के लिए सीमित रहेगी।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

News

सबसे ज्यादा पड़ गई