चेन्नई, तमिलनाडु। हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण में यह पाया गया है कि घरेलू जल शोधन प्रणालियों, विशेष रूप से रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) सिस्टम्स, का सही और नियमित रखरखाव न किए जाने पर उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। सर्वे में चेन्नई के 216 घरों से 262 नमूने लिए गए, जिनमें से कुछ ट्रीट किए गए पानी के और कुछ स्रोत के पानी के नमूने थे। इसका उद्देश्य था घरेलू जल शोधन प्रणालियों की वास्तविक प्रभावकारिता का आंकलन करना।
सर्वेक्षण से पता चला कि RO सिस्टम से निकाले गए पानी के 31 प्रतिशत नमूनों में अभी भी पदाथ E. coli पाए गए, जो यह दर्शाता है कि जल शुद्धिकरण प्रणाली पूरी तरह से प्रभावी नहीं रही। यह आंकड़ा अत्यंत चिंताजनक है क्योंकि E. coli किसी भी जल स्रोत की प्रदूषितता का प्रमुख संकेत होता है और इससे पेट संबंधी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि RO सिस्टम की नियमित सफाई और मेंटेनेंस की कमी इसके प्रदर्शन में गिरावट का मुख्य कारण है। इसके साथ ही, फिल्टर की समय-समय पर बदलवाना और मशीन की तकनीकी जांच भी जरूरी है, ताकि जल शोधन प्रक्रिया प्रभावी बनी रहे। कई घरों में सिस्टम की जटिलताओं को समझने में कमी के कारण यह सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं।
सरकारी और निजी संस्थान इस प्रकार के सर्वेक्षण कराकर यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आम जनता को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो। विशेषज्ञों ने बताया कि केवल RO सिस्टम लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे समय-समय पर जांचना और सफाई करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि जल शुद्धिकरण का असली लाभ मिल सके।
इस अध्ययन के परिणाम स्वास्थ्य विशेषज्ञों और जल प्रदायक एजेंसियों के लिए चेतावनी हैं कि वे सतत निगरानी रखें और उपभोक्ताओं को RO सिस्टम की सही देखभाल के प्रति जागरुक करें। जल शुद्धिकरण प्रणाली की खराब स्थिति से उपयोगकर्ता बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
इसलिए जल संरक्षण के साथ-साथ जल की गुणवत्ता पर ध्यान देना भी अत्यंत आवश्यक है। यह सर्वेक्षण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो जल सुरक्षा के क्षेत्र में आवश्यक सुधार और जागरूकता लाने में मदद करेगा।
Author: UP 24.in
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