नई दिल्ली, भारत। अमेरिका में काम करने के लिए H-1B वीजा पंजीकरणों में FY 2027 के लिए 38.5% की महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई है, जो कि पिछले दशक के आंकड़ों जैसा माना जा रहा है। इस गिरावट के पीछे विशेषज्ञों का कहना है कि कई आर्थिक, राजनीतिक, और नीति संबंधी कारक जिम्मेदार हो सकते हैं।
इमिग्रेशन मामलों में विशेषज्ञ अटॉर्नी ने बताया कि यह हिलचाल नया नहीं है, बल्कि यह अनुपात लगभग 10 साल पहले भी देखे गए थे, जब H-1B वीजा के लिए आवेदनों की संख्या सीमित हो गई थी। उन्होंने बताया कि यह परिवर्तन अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियों, टेक्नोलॉजी सेक्टर में बदलाव, और वैश्विक रोजगार बाजार की स्थिति को दर्शाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की गिरावट का मतलब यह है कि तकनीकी कंपनियों को विदेशी कर्मियों की भर्ती में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जो अमेरिकी श्रम बाजार पर भी प्रभाव डाल सकती है। H-1B वीजा अधिकांशतः तकनीकी और इंजीनियरिंग क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों को अमेरिका में रोजगार के लिए अनुमति देता है।
हालांकि, आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी सरकार द्वारा वीजा आवेदनों की समीक्षा प्रक्रिया में कड़ा रुख अपनाए जाने के साथ ही योग्य आवेदकों की संख्या में कमी देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति परिवर्तन का प्रभाव आने वाले वर्षों में भी जारी रह सकता है।
इसके अतिरिक्त, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने भी H-1B पंजीकरणों को प्रभावित किया है। टैक कंपनियां अब अधिक इंटर्नल टैलेंट पर निर्भर हो रही हैं और विदेशों से कामगारों की संख्या सीमित कर रही हैं।
इस संदर्भ में, इमिग्रेशन अधिवक्ताओं का सुझाव है कि वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने और अमेरिका में प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए नीतिगत सुधार आवश्यक हैं। साथ ही, कंपनियों को भी अपने रोजगार मॉडल के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता है ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बने रहें।
ये बदलाव न केवल अमेरिका के रोजगार बाजार के लिए बल्कि उन वैश्विक पेशेवरों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं जो अपनी करियर संभावनाओं के लिए H-1B वीजा पर निर्भर हैं। इस समय स्थिति में आए बदलावों की निगरानी आवश्यक है ताकि आने वाले समय में फलों वाले समाधान निकाले जा सकें।
Author: UP 24.in
News




