नई दिल्ली, दिल्ली: 2 मई 2026 को शाम 5 बजे, द हिन्दू ने “स्कूलों में यौन शिक्षा” विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया। इस वेबिनार का उद्देश्य भारत के स्कूलों में यौन शिक्षा के महत्व, उसके समावेशन की आवश्यकता तथा इससे जुड़ी सामाजिक और शैक्षिक चुनौतियों पर व्यापक चर्चा करना था।
वेबिनार में अनेक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, माता-पिता और नीति निर्धारकों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में यौन शिक्षा का समावेश न केवल आवश्यक है, बल्कि यह युवा छात्रों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की बेहतर समझ प्रदान करता है। वेबिनार में यह बात प्रमुखता से उभरकर सामने आई कि यौन शिक्षा से युवा समाज में लैंगिक समानता, सुरक्षित संबंध और जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलती है।
इस अवसर पर प्रख्यात शैक्षिक विशेषज्ञ डॉ. सीमा अग्रवाल ने कहा, “यौन शिक्षा को केवल शारीरिक विकास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह मानसिक और भावनात्मक विकास का भी एक अभिन्न हिस्सा है। इसे स्कूलों में समुचित तरीके से शामिल करना चाहिए ताकि छात्र सही जानकारी प्राप्त कर सकें और मिथकों तथा भ्रांतियों से दूर रहें।”
वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता राहुल मिश्रा ने कहा कि भारत में यौन शिक्षा को लेकर अभी भी कई प्रकार के सामाजिक झंझट और भय मौजूद हैं, जिसके कारण इसे अक्सर टाला जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार और शिक्षा मंत्रालय को मिलकर ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो यौन शिक्षा को स्कूल पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाएं।
वेबिनार के दौरान विभिन्न सर्वेक्षणों और शोध कार्यों का भी हवाला दिया गया, जो दर्शाते हैं कि यौन शिक्षा से किशोरों में यौन उत्पीड़न, अनचाहे गर्भधारण, तथा यौन संचारित रोगों की संख्या कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, इससे युवाओं में सकारात्मक और जिम्मेदार व्यवहार विकसित होता है।
अंततः, इस वेबिनार ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के विविध समाज में यौन शिक्षा को अपनाने और व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए व्यापक जागरूकता, संवेदनशीलता और ठोस नीति आवश्यक है। द हिन्दू द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने यौन शिक्षा पर बहस को न केवल प्रासंगिक बनाया, बल्कि इसके महत्व को भी रोशन किया।
Author: UP 24.in
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