नई दिल्ली, भारत – कांग्रेस के अध्यक्ष सुझाव ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मीडिया की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आज मीडिया के कई हिस्से शासकीय सत्ता की नकल करने तक सीमित हो गए हैं, जबकि वे पत्रकार जो सवाल पूछने की हिम्मत दिखाते हैं, उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
खड़गे ने कहा कि यह स्थिति लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है और सभी संबंधित पक्षों से गहन आत्मविश्लेषण की आवश्यकता है। उन्होंने जोर दिया कि मीडिया की स्वतंत्रता हमारे लोकतंत्र की रीढ़ है और इसे सुरक्षित रखना आवश्यक है ताकि जनसाधारण तक सच्ची और निर्भीक खबरें पहुंच सकें।
उन्होंने बताया कि वर्तमान शासन में, आलोचनात्मक पत्रकारिता को दंडित किया जा रहा है, जबकि जिन पत्रकारों या संस्थानों ने सत्ता के अनुसार चलने का निर्णय लिया है, उन्हें पुरस्कार और लाभ मिलने की स्थिति बन रही है। इससे समाज में सूचना के बहुरंगी और स्वतंत्र प्रवाह पर बुरी छवि पड़ रही है।
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए अपने संबोधन में खड़गे ने कहा, “मीडिया को शासन सत्ता का आईना बनाना चाहिए, न कि उसका प्रशंसक। सवाल पूछना और सत्ता को जवाबदेह ठहराना पत्रकारिता की जड़ें हैं। आज की परिस्थिति में अगर यह नहीं बचाई गई; तो आने वाले समय में लोकतंत्र की नींव कमजोर हो जाएगी।”
उन्होंने सभी मीडिया पदाधिकारियों, पत्रकारों, गुटों और नागरिक समाज से आह्वान किया कि वे मिलकर एक खुला, स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया वातावरण सुनिश्चित करें, जिससे लोकतंत्र मजबूत हो और जनतांत्रिक मूल्य कायम रहें।
विशेषज्ञों के अनुसार, विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर यह चेतावनी न केवल भारत के लिए, बल्कि विश्व के उन देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है जहां सत्ता द्वारा मीडिया को नियंत्रित करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। स्वतंत्र पत्रकारिता की रक्षा के लिए सभी को सतर्क और समर्पित रहने की आवश्यकता है।
इस विशेष दिन पर, खड़गे ने आशा जताई कि भविष्य में मीडिया में पुनः स्वतंत्रता, निष्पक्षता, और आलोचनात्मक दृष्टिकोण की वापसी होगी, जिससे लोकतंत्र पूर्ण रूप से फल-फूल सकेगा।
Author: UP 24.in
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