टोरंटो, ओंटारियो – क्लोए रोबिचॉड द्वारा निर्देशित फिल्म ‘टू वीमेन’ एक ऐसी कॉमेडी है जो अपने हास्य और कथा को लेकर आधुनिकता और पारंपरिकता के बीच उलझी नजर आती है। फिल्म की कहानी मनोरंजक होने का वादा करती है, मगर इसे एक पुरानी सोच के जाल में फंसते हुए देखना लगभग अनिवार्य लगता है।
फिल्म की मुख्य थीम और कथानक एक पुराने ट्रोप से प्रेरित हैं, जो आज के दर्शकों के लिए कुछ हद तक अप्रासंगिक महसूस होती है। इस वजह से, हास्य के अवसर कई बार अधूरे रह जाते हैं या फिर पुराने जमाने की सोच को दोहराते हुए फिल्म को पिछड़ेपन के पक्ष में ले जाते हैं।
कहानी में दो महिलाओं के बीच के रिश्ते और उनकी दैनिक जिंदगी की हल्की-फुल्की चुनौतियाँ प्रस्तुत की गई हैं, लेकिन इसके बावजूद यह फिल्म हास्य की गहराई और नवीनता दोनों में कमी महसूस कराती है। अभिनय की गुणवत्ता अच्छी है, और कलाकारों ने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की है, लेकिन पटकथा और संवादों का भार इस प्रयास को कुछ हद तक कमजोर कर देता है।
डायरेक्टर क्लोए रोबिचॉड की पिछली फिल्मों की तुलना में यह फिल्म अपेक्षित मानकों पर खरी नहीं उतर पाई है। कथावस्तु में सुधार की काफी गुंजाइश थी, खासकर तब जब कहानी में आधुनिक कॉमेडी के तत्व बेहतर तरीके से जोड़े जाते।
कुल मिलाकर, ‘टू वीमेन’ एक ऐसी कॉमेडी है जो अपने पुरानी सोच के साथ फंसी हुई नजर आती है और जो वर्तमान सेंसरशिप और दर्शकों की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं बन पाई है। यदि फिल्म में अधिक आधुनिक, ताजगी से भरपूर और संवेदनशील हास्य लाया जाता, तो यह दर्शकों को अधिक आकर्षित कर सकती थी। फिलहाल, यह फिल्म अपने पुराने ट्रोप में जकड़ी हुई है और इससे बाहर निकल पाने में सफल नहीं हो पाई है।




