लखनऊ, उत्तर प्रदेश – कैंसर जैसा डरावना शब्द सुनते ही किसी के होश उड़ जाते हैं, लेकिन जब यह खबर खुद किसी डॉक्टर को मिले तो स्थिति और भी जटिल हो जाती है। ऐसा ही अनुभव एक वरिष्ठ चिकित्सक ने साझा किया, जिन्होंने अपने लंबे करियर में कई कैंसर रोगियों की सर्जरी की और फिर अचानक वह खुद कैंसर का सामना करने लगे।
डॉक्टर का कहना है कि जब उन्हें उनकी बीमारी का पता चला तो शुरुआत में वह शांत और संयमित थे, क्योंकि उन्हें पहले से ही शक था कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। ‘‘मुझे अपनी स्थिति का एहसास था, पर जब टैस्ट रिपोर्ट्स ने यह पुष्टि की, तो मैंने खुद को संभालने की पूरी कोशिश की,’’ उन्होंने बताया।
समय के साथ, जब वे इलाज की प्रक्रिया से गुजरे, तो कई बार भावनात्मक रूप से टूटने भी लगे। ‘‘कई बार इलाज के दौरान मैं टूट गया, रोया भी, लेकिन फिर अपने आप को संभाला क्योंकि मैं जानता था कि लड़ाई लड़नी है,’’ उन्होंने अपनी भावनाओं को साझा करते हुए कहा।
आज, डॉ. कहने लगे हैं कि वे पल-ब-पल जी रहे हैं और इस कठिन दौर का सामना पूरी हिम्मत और धैर्य के साथ कर रहे हैं। ‘‘जिंदगी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। अब मैं बस यही सोचता हूं कि मैं अपनी पूरी ताकत से लड़ाई लड़ूं। जो होगा, देखा जाएगा—Que sera sera,’’ वे आगे कहते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि एक डॉक्टर के रूप में उनके अनुभव ने उन्हें काफी हिम्मत दी। ‘‘मैंने कई कैंसर मरीजों की देखभाल की है, उनकी कहानियां सुनी हैं। अब खुद मरीज बनकर, मैं एक नई चुनौती का सामना कर रहा हूं। लेकिन मेरी कोशिश यही है कि मैं न केवल खुद के लिए बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनूं,’’ उन्होंने बताया।
इस अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि अस्पताल के किसी कोने में बैठा डॉक्टर भी मरीज बन सकता है, और यह लड़ाई हर किसी के लिए समान रूप से कठिन होती है। इस बीच, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच करवाएं। जिसे देखकर रोग का जल्दी पता चल सके और बेहतर इलाज संभव हो।
डॉ. ने अपनी कहानी बड़े ही साहस और उम्मीद के साथ साझा की है, ताकि दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोग भी हिम्मत न हारे। उन्होंने अंत में कहा, “जीवन के हर पल को जियें, और कभी उम्मीद न छोड़ें।”
Author: UP 24.in
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