नई दिल्ली, भारत
कोविड-19 महामारी की दूसरी विनाशकारी लहर के दौरान, देश में कई मरीजों के इलाज में उच्च मात्रा में कॉर्टिकोस्टेरॉयड का प्रयोग व्यापक रूप से किया गया। इस मजबूत उपचार से कई संक्रमितों को बचाया जा सका, लेकिन इसका एक आशंका जनक दुष्प्रभाव भी सामने आया है। विशेष रूप से कुछ मरीजों में इससे जांघ की हड्डी के ऊपर के हिस्से का धीरे-धीरे पतन होने लगा, जिसे मेडिकल भाषा में आतंरिक कंकाल पतन (Avascular Necrosis) कहा जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कॉर्टिकोस्टेरॉयड के उच्च डोज का लंबे समय तक उपयोग हड्डियों में रक्त प्रवाह को बाधित कर सकता है, जिससे हड्डी की कोशिकाएं धीरे-धीरे मरने लगती हैं। इस प्रक्रिया के कारण जांघ की हड्डी के ऊपरी हिस्से में संरचनात्मक क्षति होती है और अंततः हिप रिप्लेसमेंट जैसी जटिल सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
डॉ. नरेंद्र कुमार, एक ऑर्थोपेडिक सर्जन, बताते हैं, “कोविड-19 के दौरान मृत्यु दर को कम करने के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉयड उपचार में भारी इजाफा हुआ। हालांकि अब हम देख रहे हैं कि कुछ मरीजों को इससे हिप जॉइंट की समस्या हुई है।”
यह बीमारी मुख्यतः 30 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में सामने आ रही है, जो आश्चर्यजनक है क्योंकि आमतौर पर हिप रिप्लेसमेंट के लिए उम्रदराज मरीज होते हैं। इस लक्षण से जुड़ी शुरुआती पहचान और उपचार में देरी भी समस्या को और बढ़ा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि यदि कोविड उपचार के बाद जांघ या हिप में लगातार दर्द हो रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। समय पर निदान और सही इलाज से हिप रिप्लेसमेंट जैसी बड़ी सर्जरी को टाला जा सकता है।
इस नई चुनौतियों के बीच, अस्पताल और चिकित्सा केंद्र अब कोविड-19 डिब्रीडमेंट के बाद की दीर्घकालिक जटिलताओं को समझने और उनका प्रबंधन करने के लिए कदम उठा रहे हैं। मरीजों में सावधानी बरतने के साथ-साथ चिकित्सकों को भी संवेदनशीलता के साथ उपचार करना होगा ताकि इस समस्या को बढ़ने से रोका जा सके।
Author: UP 24.in
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