भारत के भीड़भाड़ वाले अस्पतालों में एंटीबायोटिक्स से असंभव कार्य करवाने की एक नई पुस्तक

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A new book shows how, in India’s overcrowded hospitals, antibiotics are asked to do the impossible

हैदराबाद, तेलंगाना

भारत में सार्वजनिक अस्पतालों की भीड़भाड़ और संसाधनों की कमी के बीच, एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक उपयोग एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि अस्पतालों में जाँच सुविधाएँ और बुनियादी ढांचा अपेक्षित स्तर से काफी कम हैं। इसी वजह से डॉक्टरों पर यह दबाव है कि वे आज मरीज को जीवित रखने के लिए एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करें, जबकि औषधि प्रतिरोध (antibiotic resistance) तेजी से बढ़ रहा है।

डॉक्टर कृष्ण नायर, जो हैदराबाद के एक अस्पताल से जुड़े हैं, बताते हैं कि पहले एमोक्सिसिलिन (amoxicillin) आमतौर पर उपयोग में लाया जाने वाला एंटीबायोटिक था, लेकिन अब यह दवा प्रभावी नहीं रह गई है। यह बात केवल एक दवा की विफलता को नहीं दर्शाती, बल्कि पूरे देश में बढ़ते औषधि प्रतिरोध की गंभीर स्थिति को उजागर करती है।

अस्पतालों की स्थिति और एंटीबायोटिक्स का दायरा

भारत के अधिकांश सरकारी अस्पताल गहन भीड़भाड़, अपर्याप्त वित्तीय संसाधन और सीमित बुनियादी ढांचे से जूझ रहे हैं। इस तरह की स्थिति में डॉक्टरों के लिए एंटीबायोटिक्स का सही प्रयोग करना बेहद मुश्किल कार्य हो जाता है। वे न केवल प्रतिरोध की समस्या से जूझ रहे हैं, बल्कि हर उस मरीज को बचाने की कोशिश कर रहे हैं जो उनके सामने है।

अस्पतालों में उपलब्ध सीमित डायग्नोस्टिक परीक्षणों की वजह से अक्सर संक्रमण का सटीक कारण बताना संभव नहीं होता, जिससे डॉक्टर एंटीबायोटिक्स बिना पूर्ण जानकारी के दे देते हैं। यह स्थिति न केवल औषधि प्रतिरोध को बढ़ावा देती है, बल्कि मरीजों के लिए भविष्य में उपचार के विकल्पों को भी सीमित कर देती है।

औषधि प्रतिरोध का व्यापक प्रभाव

एंटीबायोटिक प्रतिरोध एक जैविक और सामाजिक समस्या दोनों है। जब किसी संक्रमण में उपयोग की जाने वाली दवाएं प्रभाव खो देती हैं, तो स्वास्थ्य प्रणाली पर इसका दबाव और बढ़ जाता है। इसका सीधा असर अस्पताल के भर्ती दर, उपचार की जटिलताओं और मृत्यु दर में बढ़ोतरी के रूप में देखने को मिलता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में इसके प्रभाव को कम करने के लिए बेहतर अस्पताल प्रबंधन, सही डायग्नोस्टिक उपकरण, और दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता है। इसके अलावा, सार्वजनिक जागरूकता और नीति निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है।

अतः भारत के अस्पतालों में एंटीबायोटिक्स पर निर्भरता को नियंत्रित करना और प्रतिरोध की बढ़ती समस्या से लड़ना वर्तमान स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। अधिक संसाधन, तकनीकी नवाचार और जवाबदेही से ही इस संकट का समाधान संभव है।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

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