जब जनता बुनियादी जरूरतों को भी पूरा नहीं कर पाती, तब भाजपा दूसरों पार्टियों की खरीद में लगी है : मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर किया हमला

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'BJP busy buying parties when people can't afford necessities': Mallikarjun Kharge targets Centre over inflation

नई दिल्ली, भारत – मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि जनता जब अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को भी पूरा करने में असमर्थ है, तब भाजपा राजनीतिक पार्टियों को खरीदने में व्यस्त है। उन्होंने यह टिप्पणी भारी महंगाई और आम आदमी के जीवनोपयोगी वस्तुओं के बढ़ते दामों के बीच की गई है।

खड़गे ने कहा कि केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण जनता का जीवन बहुत कठिन हो गया है। बढ़ती महंगाई ने लोगों की जेबों को खाली कर दिया है और अधिकांश भारतीय परिवारों के लिए रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है। इस स्थिति में भाजपा का राजनीतिक फायदे के लिए पार्टियों को खरीदना नैतिकता के विपरीत है और यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए हानिकारक है।

उन्होंने यह भी बताया कि जब बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले) परिवार खाने-पीने की वस्तुओं पर खर्च भी कम करने को मजबूर हैं, उस समय पार्टी खरीदने जैसी हरकत देश की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए। खड़गे के मुताबिक, सरकार को चाहिए कि वह सबसे पहले आम जनता की समस्याओं को सुलझाए और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए।

महंगाई की मार से देश के गरीब और मध्यम वर्ग कठिनाई में हैं। राशनिंग, ईंधन की बढ़ती कीमतें, बिजली दरों में वृद्धि और अन्य आवश्यक वस्तुओं के बढ़े हुए दाम ने लोगों को आर्थिक तंगी में डाल दिया है। इस परिस्थिति में विपक्षी दल भाजपा सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वह अपनी नीतियों में सुधार करे और जनता को राहत दिलाए।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “जब जनता वीरान होती है, तो सरकार को चाहिए कि वह जनता की आवाज बनें और उनकी समस्याओं को सुलझाने में जुटे न कि अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने या पार्टियों को खरीदने में। यह समय राजनीति से ऊपर उठकर देश के लिए सोचने का है।”

वहीं केंद्र सरकार की ओर से इस विषय पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जारी महंगाई और जनता की नाराजगी के बीच भाजपा की गतिविधियां काफी संवेदनशील हैं और इसका राजनीतिक प्रभाव आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है।

इस पूरी चर्चा का केंद्र विषय है आम आदमी की जिंदगी और सरकार की प्राथमिकताएं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक दलों के बीच कार्रवाई और बयानबाजी तेज होती जा रही है। परंतु जनता की उम्मीदें और परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। सरकार के लिए यह एक चुनौती बनी हुई है कि वह अपनी नीतियों और कार्यों से आम जनता के विश्वास को बनाए रखे।

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