कोयंबत्तूर में 16 वर्ष पहले हुई भाई-बहन हत्या और पुलिस मुठभेड़ जिसने मचाई हलचल

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Murder of siblings and a police encounter that rocked Coimbatore 16 years ago

कोयंबत्तूर, तमिलनाडु – 1 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने मनोहरन को मौत की सजा सुनाई। इस सजा को ‘‘बहुत दुर्लभ मामलों’’ में से एक करार दिया गया। यह फैसला उस मामले में आया जिसमें 16 साल पहले कोयंबत्तूर में दो भाई-बहन की निर्मम हत्या हुई थी और पुलिस मुठभेड़ ने पूरे राज्य में भारी हलचल मचा दी थी।

मामले की शुरूआत 2003 में हुई जब पुलिस को सूचना मिली कि दो भाई-बहन की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई है। घटना के बाद से जांच में कई मोड़ आए। पुलिस ने हत्या के आरोपित मनोहरन को गिरफ्तार किया और उसकी गिरफ्तारी के दौरान एक मुठभेड़ भी हुई, जिसे लेकर मीडिया और आम जनता में काफी चर्चा हुई।

मनोहरन का केस ‘‘रेरेट ऑफ रेयर’’ कैटेगरी में क्यों रखा गया, इसका कारण था इससे पहले की सुनवाईयों में अपराध की गंभीरता और अपराधी की मानसिक स्थिति को गहराई से समझना। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस केस में सजा का फैसला न्याय के लिहाज से जरूरी था ताकि कानून का सख्ती से पालन हो सके और अन्याय को रोका जा सके।

पुलिस मुठभेड़ के दौरान मनोहरन ने कहा था कि उसने हत्या का अपराध स्वीकार किया था, लेकिन उसने खुद को बचाने का कोई तरीका नहीं था। कोर्ट ने मामले के सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करते हुए पॉजिटिव साक्ष्यों को आधार बनाया।

मनोहरन की सजा का फैसला कोर्ट के इतिहास में भी एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है क्योंकि इसने ‘‘रेरेट ऑफ रेयर’’ की परिभाषा को और भी स्पष्ट किया। इस फैसले के बाद तमिलनाडु पुलिस ने अपनी जांच प्रक्रियाओं को भी और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अन्य मामलों में भी नजीर बनेगा और कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद करेगा। जनता में भी इस फैसले को लेकर संतोष का माहौल है और उम्मीद जताई जा रही है कि इसी तरह के फैसलों से न्याय प्रक्रिया और पारदर्शी होगी।

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UP 24.in
Author: UP 24.in

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