चेन्नई, तमिलनाडु। प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) के संस्थापक और कुलपति जी. विश्वनाथन ने बताया कि संस्थान ने पिछले लगभग डेढ़ दशक से ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों के मेधावी छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से छात्रवृत्ति योजना चलाई है। इस योजना के माध्यम से अब तक ₹100 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्तियां वितरित की जा चुकी हैं।
विश्वनाथन ने बताया कि यह योजना विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए बनाई गई है जो हाईयर सेकेंडरी परीक्षा में उत्कृष्ट अंक हासिल करते हैं लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के कारण उच्च शिक्षा जारी रखने में असमर्थ रहते हैं। उनका मानना है कि योग्य और प्रतिभाशाली छात्रों को आर्थिक बाधाओं के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य ग्रामीण भारत के छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा के अवसर प्रदान करना है ताकि वे अपने सपनों को पूरा कर सकें और समाज के विकास में योगदान दे सकें। VIT छात्रवृत्ति योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
इस योजना के तहत चयनित छात्रों को पूर्ण या आंशिक शुल्क में छूट के साथ-साथ अन्य शैक्षणिक सहायता भी प्रदान की जाती है। VIT ने कई सरकारी स्कूलों के साथ साझेदारी की है ताकि योग्य छात्रों को इस योजना के लाभ आसानी से मिल सकें।
शिक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि इस तरह की पहल देश के शैक्षिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव लाने में कारगर साबित हो रही है। इससे न केवल छात्रों का मनोबल बढ़ता है बल्कि वे अपने लक्ष्य की ओर दृढ़संकल्प के साथ बढ़ते हैं। VIT जैसी संस्थाएं जब इस प्रकार की योजनाएं चलाती हैं, तो इसका प्रभाव स्थानीय स्तर पर सामाजिक और आर्थिक विकास दोनों पर पड़ता है।
विश्वनाथन ने आगे कहा कि वे भविष्य में भी इस योजना को और व्यापक बनाने का प्रयास करेंगे ताकि अधिक से अधिक छात्र इसका लाभ उठा सकें। साथ ही, उन्होंने अन्य शिक्षा संस्थानों और दानदाताओं से भी इस दिशा में सहयोग की अपील की।
इस योजना का लाभ उठाने वाले कई छात्र अब विभिन्न क्षेत्रों में सफल हैं और वे स्वयं आगामी पीढ़ी को प्रेरित कर रहे हैं। VIT का यह कदम ग्रामीण शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए एक उदाहरण बन चुका है।
Author: UP 24.in
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