चेन्नई, तमिलनाडु। शहर में हाल ही में एक जॉयराइड घोड़े की मृत्यु के बाद, जो एक अत्यंत संक्रामक बैक्टीरियल रोग ग्लैंडर्स (Glanders) के कारण हुई, लगभग 200 घोड़ों के नमूने हरियाणा स्थित एक परीक्षण केंद्र भेजे गए हैं। इस कदम का उद्देश्य इस खतरनाक रोग के फैलाव को रोकना और संक्रमण की पुष्टि करना बताया गया है।
स्थानीय पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मृत घोड़े का परीक्षण किया गया था, जिसमें ग्लैंडर्स रोग की पुष्टि हुई। इसके बाद क्षेत्र में मौजूदा अन्य जॉयराइड घोड़ों के सैंपल इकट्ठा कर उनकी जांच के लिए भेजे गए। साथ ही घोड़ों को संभालने वालों के भी नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं ताकि संक्रमण के संभावित फैलाव पर नजर रखी जा सके।
ग्लैंडर्स एक ऐसी बीमारी है जो खास तौर पर घोड़ों, खच्चरों और ठेंगों को प्रभावित करती है, लेकिन यह मनुष्यों में भी फैल सकती है। यह रोग पब्लिक हेल्थ के लिए गंभीर चुनौती है क्योंकि यह अत्यंत संक्रामक और जानलेवा हो सकती है। इसीलिए चिकित्सा और पशुपालन विभाग दोनों ने मिलकर तत्काल प्रभाव से इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं।
अधिकारियों ने जनता से भी अपील की है कि वे सुनियोजित नियमों का पालन करें और ऐसे जानवरों से दूरी बनाएं जिनमें बीमारी के लक्षण दिखाई दें। घोड़ों के मालिकों को आग्रह किया गया है कि वे अपने जानवरों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें और अगर किसी भी तरह के असामान्य लक्षण दिखें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि शहर के विभिन्न हिस्सों में सर्वे और नुमूने लेने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इससे पहले भी इस प्रकार के रोग नियंत्रण के लिए कई बार छापामारी और जांच अभियान चलाए जा चुके हैं। यह भी संभावना जताई जा रही है कि इस बार जांच प्रक्रिया में और अधिक सावधानी बरती जाएगी ताकि संक्रमण के स्रोत का पता चल सके और आवश्यक रोकथाम की जा सके।
गांवों और शहर के बीच जॉयराइड घोड़ों का व्यापार काफी आम है, इस वजह से संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। इस परिस्थिति में सभी संबंधित विभाग, पशुपालक और जनता का सहयोग बेहद जरूरी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि वे सभी जरूरी जांच, उपचार तथा नियंत्रण कार्य प्राथमिकता से करेंगे और घटना से निपटने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए भविष्य में भी नियमित निरीक्षण और जागरूकता कार्यक्रम जारी रहेंगे। पशु स्वास्थ्य को बनी रखने के लिए सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि शहर में इस तरह के संक्रामक रोगों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
Author: UP 24.in
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