बंगाल ने भ्रष्टाचार मामलों में अधिकारियों के खिलाफ CBI को अभियोजन की अनुमति दी

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Bengal allows CBI to prosecute officials in corruption cases

कोलकाता, पश्चिम बंगाल। राज्य सरकार ने बुधवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को उन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज करने और अभियोजन की अनुमति दे दी है जिन पर स्कूलों, नगरपालिका और सहकारी क्षेत्र में कथित भर्ती घोटालों में भ्रष्टाचार का आरोप है। यह जानकारी The Telegraph ने दी है।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पूर्व त्रिपक्षीय कांग्रेस सरकार ने इस अनुमति को रोक कर ‘‘भ्रष्ट नौकरशाहों और अधिकारियों को बचाने’’ की कोशिश की थी, जैसा कि The Hindu में बताया गया।

CBI को राज्य सरकार से अनुमति लेनी होती है ताकि वह अपने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सके या आरोपपत्र दाखिल कर सके। अधिकारी ने बताया कि नई भारतीय जनता पार्टी सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में ‘शून्य सहिष्णुता’ नीति अपनाएगी, और इसका पालन कर रही है। यह जानकारी The Hindu ने भी दी है।

भाजपा सरकार ने विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को हराकर शनिवार को सत्ता संभाली। CBI को अदालत के निरीक्षण वाले मामलों में कार्रवाई की अनुमति दी गई है, इसके बारे में The Times of India ने उल्लेख किया है।

सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ‘‘संस्थागत भ्रष्टाचार’’ के खिलाफ कार्रवाई भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र का हिस्सा है और आने वाले दिनों में और भी कदम उठाए जाएंगे।

यह टिप्पणी इसी सप्ताह तब आई है जब टीएमसी नेता सुजीत बोस, जो पूर्व अग्नि और आपातकालीन सेवा मंत्री थे, आरोपित गैरकानूनी नियुक्तियों के संबंध में सोमवार को दक्षिण डुम दुम नगरपालिका में गिरफ्तार किए गए। बुधवार को एक अदालत ने बोस को प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया।

कथित भर्ती घोटाले

स्कूल भर्ती घोटाला मुख्य रूप से अवैध नियुक्तियों से जुड़ा है, जहां योग्य न होने के बावजूद कुछ उम्मीदवारों को प्राथमिक शिक्षक पदों पर नियुक्ति दी गई। इसी तरह, नगरपालिका एवं सहकारी मंडलाओं में भी रिकॉर्ड में बिना उचित प्रक्रिया के नियुक्तियां की गईं, जो व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार को दर्शाती हैं।

राज्य सरकार ने इस संबंध में CBI को कार्रवाई की अनुमति देकर इस प्रकार की प्रथाओं का विरोध करने का स्पष्ट संदेश दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम भ्रष्टाचार को समाप्त करने और पारदर्शिता बढ़ाने हेतु उठाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से आगे चलकर बंगाल में सरकारी कार्य प्रणाली में सुधार देखने को मिलेगा, जिससे लोगों में शासन व्यवस्था के प्रति विश्वास भी बढ़ेगा।

हालांकि, विपक्षी दल इस निर्णय की आलोचना भी कर रहे हैं और इसे राजनीतिक प्रेरित कदम करार दे रहे हैं। लेकिन शासन पक्ष का कहना है कि न्यायतंत्र के अनुसार कार्रवाई की जा रही है और किसी भी तरह की राजनीतिक दखलअंदाजी का सवाल ही नहीं है।

अब देखना होगा कि आगामी दिनों में CBI इन मामलों में किन गंभीर कदमों को आगे बढ़ाती है और भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या ठोस परिणाम निकलते हैं।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

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