गुवाहाटी, असम। असम में आगामी चुनावों को लेकर एक विवादित मामला सामने आया है जहां अनुपस्थितिजनक जनता पार्टी (AJP) की उम्मीदवार कुंकि चौधरी की मां सुजाता गुरुङ चौधुरी ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुजाता ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने बिना उनके जीवन, खानपान, संस्कृति, धर्म, और राजनीति संबंधी विचारों को जाने, उन्हें ‘गोमांस खाने वाली’, ‘गैर-सनातनी’ और ‘भारत-विरोधी कम्युनिस्ट’ जैसे ठप्पे लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ये आरोप उनके व्यक्तित्व और विचारों का पूरी तरह से अपमान हैं।
सुजाता गुरुङ चौधुरी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की इन टिप्पणियों से न केवल उनकी व्यक्तिगत छवि को ठेस पहुंची है, बल्कि इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ये आरोप बिना किसी ठोस आधार या जाँच-पड़ताल के लगाए गए हैं और इसका मकसद केवल राजनीतिक लाभ लेना है।
उन्होंने आगे कहा, “मेरा खानपान, मेरा धर्म और मेरी विचारधारा विषय में बिना जानकारी के ऐसी टिप्पणियां अस्वीकार्य हैं। मेरी संस्कृति और मेरी जीवनशैली के बारे में गलतफहमियां फैलाना दुर्भावना और बदनामी फैलाने के समान है।” इस बयान के साथ उन्होंने असम के मुख्यमन्त्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
सुजाता गुरुङ चौधुरी ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने माफी नहीं दी, तो वे उचित विधिक कार्रवाई करेंगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री के विरुद्ध एक लाख रुपये के बजाय मात्र एक रुपये के हर्जाने की मांग की है ताकि यह मामला न्यायालय में पहुंचकर उपयुक्त तरीके से सुलझाया जा सके।
राजनीय विश्लेषकों का मानना है कि असम में चुनावी राजनीति पहले से ही तीव्र है और इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप और विवादों से मतदाताओं के मन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। इससे उम्मीद की जा रही है कि चुनाव आयोग और संबंधित पार्टियां इस मामले की निष्पक्ष जांच करेंगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक पार्टियां और सामाजिक संगठन इस विवाद पर नजर बनाए हुए हैं। इस विवाद ने न केवल स्थानीय राजनीति में नया मोड़ लाया है बल्कि पूरे राज्य में चर्चाओं का विषय भी बना हुआ है।
असम के चुनावी माहौल में ये घटनाएं यह दर्शाती हैं कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में सांस्कृतिक और व्यक्तिगत मुद्दों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लोकतंत्र की मूल भावनाओं के विपरीत है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सभी राजनीतिक दल और नेता तथ्यात्मक और सम्मानपूर्वक बहस में लगे रहें और गलत सूचनाओं से जनता को भ्रमित न करें।
Author: UP 24.in
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