डॉक्टर्स ने कहा: नई माताओं के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें

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Pay attention to mental health of new mothers, say doctors

कोयंबटूर, तमिलनाडु – कई महिलाओं को बच्चे के जन्म के बाद पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। कोवरी अस्पताल के डॉक्टरों ने इस गंभीर मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता जताई है।

डॉक्टरों का कहना है कि प्रसव के बाद महिला के शरीर और मन दोनों में कई बदलाव आते हैं, जिनका सही समय पर इलाज न किया जाना लंबी अवधि में गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिला को निरंतर उदासी, थकान, चिंता और अकेलेपन का अनुभव होता है।

कोवरी अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. रीता कुमारी ने बताया, “हमारे यहां इलाज के लिए आने वाली अधिकांश महिलाओं ने न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी भारी परेशानियों का सामना किया है। इसलिए जरूरी है कि परिवार और समाज इसका सही समर्थन करें एवं महिलाओं को खुलकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का मौका दें।”

विशेषज्ञों का कहना है कि पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन से जुड़ी समस्याओं को समय रहते पहचानकर चिकित्सीय मदद लेना आवश्यक है। डॉक्टरों ने कहा कि नई माताओं को पर्याप्त आराम, पोषण और प्यार मिलना चाहिए। इसके साथ ही परिवार का सहयोग भी एक बड़ी भूमिका निभाता है।

कोवरी अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. संजय मेनन ने कहा, “स्तनपान कराने वाली महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि मां की मानसिक सेहत बच्चे के विकास पर भी गहरा प्रभाव डालती है। इसलिए, इस प्रकार की मानसिक विकारों को लेकर कोई भी आशंका होने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।”

डॉक्टरों ने यह भी जोर दिया कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बनी भ्रांतियों को दूर किया जाना चाहिए ताकि महिलाओं को उचित सम्मान और समझ मिल सके। पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटने का बाधक नहीं बल्कि एक इलाज योग्य अवस्था है।

अंत में, डॉक्टरों ने परिवार के सदस्यों से अपील की है कि वे नई माताओं की भावनात्मक आवश्यकताओं को समझें और उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। इससे न केवल महिला खुद बेहतर महसूस करेगी, बल्कि पूरा परिवार खुशहाल रहेगा।

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UP 24.in
Author: UP 24.in

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