स्कूल प्रशासन के विकेंद्रीकरण के प्रयास में केंद्र ने स्थानीय समितियों को अधिकार दिए

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In bid to decentralise school governance, Centre mandates, empowers local committees

नई दिल्ली, भारत

केंद्र सरकार ने स्कूल प्रबंधन समितियों (SMCs) के दायरे को माध्यमिक विद्यालयों तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस नए आदेश के अनुसार, अब SMCs को न केवल प्राइमरी बल्कि सेकेंडरी स्कूलों में भी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। इसका उद्देश्य शिक्षा के स्तर को और अधिक प्रभावी बनाते हुए स्थानीय समुदाय की सहभागिता को बढ़ावा देना है।

शिक्षा मंत्रालय ने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि SMC में कम से कम 75% सदस्य अभिभावक होंगे, जिनमें 50% महिलाएं होनी अनिवार्य हैं। इस बदलाव से सुनिश्चित होगा कि माता-पिता और स्थानीय महिलाएं विद्यालयों के संचालन में मुख्य भूमिका निभाएं। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि समुदाय के लिए जवाबदेही भी बढ़ेगी।

इसके अतिरिक्त, SMC को अब ₹30 लाख तक के सभी स्कूल नागरिक कार्यों को खुद अमल में लाने और समीक्षा करने का अधिकार दिया गया है। इसका मतलब है कि स्कूल परिसर में भवन निर्माण, मरम्मत, और अन्य आवश्यक कार्यों की देखरेख स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से होगी, जिससे विकास कार्यों की गति तेज होगी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

प्रगति की निगरानी के लिए SMCs को प्रधानमंत्री पोषण योजना (PM-POSHAN) के कार्यान्वयन को भी मॉनिटर करना होगा। यह योजना स्कूलों में बच्चों को पोषणयुक्त भोजन मुहैया कराती है। SMCs की निगरानी से ये सुनिश्चित किया जाएगा कि योजना का लाभ समय पर और सही तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी से नीतियों को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा। साथ ही, महिलाओं की बढ़ती सहभागिता से स्कूलों के अंदर सामाजिक समावेशन को भी बल मिलेगा।

हालांकि, कुछ शिक्षाविद् और अभिभावक इस बदलाव को चुनौतीपूर्ण भी मानते हैं। उनका कहना है कि सदस्य बनने वाले अभिभावकों को विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारियां संभालने के लिए उचित प्रशिक्षण और संसाधन प्रदान किए जाने चाहिए। ऐसा न होने पर नीतियां प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकेंगी।

अंततः यह देखना होगा कि नए नियमों का अभ्यास स्कूल स्तर पर किस प्रकार किया जाता है और किस हद तक स्कूलों का संचालन पारदर्शी व जवाबदेह बन पाता है। केंद्र सरकार का मानना है कि इस बदलाव से न केवल शिक्षा प्रणाली में सुधार होगा बल्कि शिक्षा का विकेंद्रीकरण छात्र हित में नई संभावनाएं खोलेगा।

Source

UP 24.in
Author: UP 24.in

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