बेंगलुरु, कर्नाटक। कोविड-19 महामारी के दौरान और उसके बाद जनता में किए गए परीक्षणों की संख्या में गिरावट के बावजूद, शोधकर्ताओं ने सीवेज पानी के नमूनों के विश्लेषण से छुपे हुए कोविड के मामलों का पता लगाया है। यह खोज इस बात की पुष्टि करती है कि कोविड संक्रमण की निगरानी के लिए कई तरीकों का उपयोग आवश्यक है, खासकर जब सार्वजनिक परीक्षण में कमी आ जाती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, जब बड़ी महामारी की लहरें कम हो जाती हैं और लोग टेस्टिंग से कतराने लगते हैं, तो केवल मरीजों के जांच आंकड़ों पर निर्भर रहना संक्रमण की वास्तविक स्थिति को छुपा सकता है। इसके विपरीत, सीवेज निगरानी जैसे वैकल्पिक और व्यापक तरीकों से संक्रमण की प्रवृत्ति को समझा जा सकता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि बेंगलुरु में जलाशयों एवं सीवेज प्लांटों के नमूनों की नियमित जाँच से कोविड वायरस के वायरल लोड में बदलाव का पता चलता रहा है। इस प्रक्रिया से यह समझने में मदद मिली कि शहर में संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं या संक्रमण कम हो रहा है। खासकर तब जब सार्वजनिक टेस्टिंग की संख्या घट जाती है, ऐसी निगरानी प्रणाली अधिक विश्वसनीय डेटा प्रदान करती है।
इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले एक शोधकर्ता ने कहा, “सीवेज विश्लेषण से मिली जानकारी ने यह स्पष्ट किया है कि कोविड के मामले कम हुए नहीं बल्कि परीक्षण में गिरावट के कारण रिपोर्ट नहीं हो रहे थे। यह Surveillance के लिए एक आवश्यक उपकरण साबित हुआ है।”
विशेषज्ञों ने सरकार एवं स्वास्थ्य एजेंसियों से इस तरह की मल्टी-लेयर निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने का आह्वान किया है ताकि महामारी के दौरान और बाद में संक्रमण की स्थिति पर सतत नजर रखी जा सके।
इस तरह की शोध से यह भी स्पष्ट होता है कि महामारी की अंतिम लहरों के बाद भी वायरस का प्रसार जारी रह सकता है, और इसके असर को समझने के लिए अलग-अलग स्रोतों से डेटा एकत्रित करना जरूरी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों को प्रभावी बनाने के लिए कोविड निगरानी में विविधता अनिवार्य है।
बेंगलुरु सरकार ने इस अध्ययन की उपलब्धि को स्वीकार करते हुए कहा है कि वे भविष्य में सीवेज निगरानी को नियमित रूप से जारी रखेंगे और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।
Author: UP 24.in
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