धनी देशों में 2048 तक गर्भाशय ग्रीवा कैंसर खत्म हो सकता है, गरीब देशों में प्रगति धीमी: अध्ययन

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Rich nations might eliminate cervical cancer by 2048, progress slow in poor countries: study

नई दिल्ली, भारत – गर्भाशय ग्रीवा कैंसर, जो महिलाओं में कैंसर के कारण होने वाली दूसरी सबसे बड़ी मौतों में से एक है, उन राज्यों में जहां इसका प्रसार अधिक है, वहां इस रोग में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, जागरूकता और टीकाकरण के कारण धनी देशों में इस रोग से निपटने में तेजी आई है, लेकिन गरीब और विकासशील क्षेत्र अभी भी इस रोग के प्रबंधन में काफी पीछे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, जिन क्षेत्रों में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की घटनाएं ज्यादा हैं, वहां उपयुक्त रोकथाम और उपचार प्रयासों से मामलों में खासा सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, विकसित और अमीर देशों में 2048 तक इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त करने की संभावना है, वहीं गरीब देशों में संसाधनों की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं की अनुपलब्धता और जागरूकता की कमी के कारण प्रगति अपेक्षाकृत धीमी होगी।

विश्लेषकों का कहना है कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के खिलाफ टीकाकरण, नियमित स्क्रीनिंग और बेहतर उपचार विकल्पों के प्रचार-प्रसार से इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। “शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देना और महिलाओं तक सुविधा पहुंचाना सबसे बड़ा कदम होगा,” एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया।

सरकारी कार्यक्रमों और गैर-सरकारी संगठनों की पहल के तहत कई क्षेत्रों में HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन की पहुंच बढ़ाने का काम हो रहा है, जो इस कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है। लेकिन अभी भी ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में इसका प्रभावी क्रियान्वयन चुनौतियों से भरा है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से लड़ाई में सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाएं भी बड़ी चुनौती हैं। महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए संगठित प्रयासों की आवश्यकता है ताकि वे नियमित जांच करवा सकें और समय पर इलाज शुरू कर सकें।

इसी कड़ी में सरकारें और स्वास्थ्य एजेंसियां टीकाकरण, स्क्रीनिंग और उपचार के लिए ज्यादा संसाधन आवंटित कर रही हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दशकों में इस रोग को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि निरंतर सहयोग और समर्पित प्रयासों के बिना गर्भाशय ग्रीवा कैंसर को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं होगा।

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UP 24.in
Author: UP 24.in

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