ढाका, बांग्लादेश
बांग्लादेश सरकार ने गुरुवार को अस्थायी भारतीय उच्चायुक्त पवन बधे को तलब किया है ताकि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा दिए गए ‘बांग्लादेश विरोधी’ कथित टिप्पणी पर विरोध जताया जा सके। इस बारे में ढाका ट्रिब्यून ने रिपोर्ट किया है कि बांग्लादेश सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए हानिकारक बताया है।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सरमा द्वारा कौन-से व्याख्यान या बयान ने इस कदम को प्रेरित किया, लेकिन फॉरन अफेयर्स मंत्रालय के दक्षिण एशिया निदेशक जनरल इशरत जहां ने इस विषय पर भारतीय उच्चायुक्त से चर्चा की। द डेली स्टार द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, यह बैठक अधिकारियों के बीच हुई जिसमें दोनों पक्षों ने अपने-अपने दृष्टिकोण रखे।
ढाका ने इन टिप्पणियों को ‘अपमानजनक’ बताया है और नई दिल्ली को अपनी असंतुष्टि से अवगत कराया है, जैसा कि टाइम्स ऑफ इंडिया ने उल्लेख किया है। इस बैठक के बाद कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन यह माना जा रहा है कि यह कदम असम के मुखिया के एक पूर्व साक्षात्कार के कारण उठाया गया है।
सरमा के हाल के बयानों का असर
भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया जाना सरमा के हाल के एक इंटरव्यू से जुड़ा है, जो 15 अप्रैल को भारतीय चैनल ABP न्यूज पर प्रसारित हुआ था। इस इंटरव्यू में उन्होंने भारत-बांग्लादेश के संबंधों और सुरक्षा चुनौतियों पर अपनी राय रखी थी।
सरमा ने कहा था, “हमें तब अच्छा लगता है जब भारत और बांग्लादेश के संबंध अच्छे नहीं होते, क्योंकि जब संबंध अच्छे होते हैं तो सरकार अप्रवासी या बिना दस्तावेज़ों वाले लोगों को वापस भेजने के लिए उतनी कार्रवाई नहीं करती। इसलिए असम के लोग तब संतुष्ट महसूस करते हैं जब भारत और बांग्लादेश के बीच शत्रुता का माहौल बना रहता है।”
उन्होंने यह भी कहा, “मैं हमेशा प्रभु से प्रार्थना करता हूं कि भारत-बांग्लादेश के संबंध बेहतर न हों ताकि बीएसएफ (बॉर्डर सिक्यूरिटी फोर्स) की टिप्पणियों पर किसी प्रकार की ढील न आए।”
इन बयानों ने द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है और बांग्लादेश सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए भारतीय अधिकारी को अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए बुलाया है।
यह मामला दोनों देशों के लिए एक चुनौती बन गया है जहाँ पारंपरिक रूप से आपसी सहयोग और सीमा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि राजनीतिक नेताओं के ऐसे बयान क्षेत्रीय समन्वय और सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं और इन मुद्दों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना आवश्यक है।
बांग्लादेश और भारत के बीच पारंपरिक रूप से मजबूत आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंध रहे हैं, परंतु हाल के वर्षों में कुछ अप्रिय वाक्यों और घटनाओं ने द्विपक्षीय संवाद में बाधाएं उत्पन्न की हैं। इस घटना के बाद दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएँ और आगामी कूटनीतिक कदम इस क्षेत्र में स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है कि कैसे भारत-बांग्लादेश संबंध सुधरेंगे और दोनों देश सीमापार रहने वाले लोगों के लिए बेहतर सहयोग स्थापित करेंगे।
Author: UP 24.in
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