न्यायालय अब सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रहे हैं, कहते हैं सीजेआई

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Courts now face challenge of preserving public trust, says CJI

नई दिल्ली, भारत

देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने हाल ही में कहा है कि न्यायालयों के सामने अब सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि लोकतंत्र के स्तंभों के रूप में न्यायालयों को अपनी विश्वसनीयता को बनाए रखना अतिआवश्यक है ताकि जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।

सीजेआई ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायपालिका को न केवल संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करना है बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि न्याय व्यवस्था पारदर्शी, त्वरित और न्यायसंगत हो। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जनमत में विश्वास कायम रखने के लिए आवश्यक है कि न्यायालय निष्पक्षता और स्वतंत्रता बनाए रखे।

उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान समय की जटिलताओं ने न्यायपालिका के सामने नए प्रकार की चुनौतियां प्रस्तुत की हैं, जैसे सामाजिक मीडिया के प्रभाव, तीव्र सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं और कानूनी प्रक्रिया में तेजी की मांग। इसलिए न्यायालयों को नई तकनीकों और नीतियों के माध्यम से इन चुनौतियों से निपटना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक विश्वास का क्षरण न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है, जिससे न्याय की पहुँच गरीब और वंचित वर्गों तक कठिन हो सकती है। इसलिए, इन मुद्दों पर न्यायपालिका द्वारा उठाए गए कदम सकारात्मक संकेत हैं।

इस संदर्भ में, अदालत की कार्यप्रणाली में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं जिसमें डिजिटलीकरण, प्राथमिकता के मामले तय करना और न्यायाधीशों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देना शामिल है। न्यायपालिका के इस संकल्प से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में न्याय व्यवस्था और भी अधिक सशक्त और विश्वसनीय बनेगी।

देश की सबसे बड़ी अदालत के प्रमुख की ये बातें देश के नागरिकों के लिए आश्वासन हैं कि न्याय और कानून का शासन निरंतर सुरक्षित रहेगा तथा न्यायपालिका समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाएगी।

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